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होलिका दहन पर 500 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राशियों पर असर

holika dahan 2020 muhurat

हिल मेल न्यूज, देहरादून

उत्तराखंड समेत पूरे देशभर में होली का खुमार चढ़ने लगा है। आज होलिका दहन है और कल पूरे हर्षोल्लास के साथ लोग रंगों का त्योहार मनाने की तैयारियों में जुटे हैं। बाजारों में अबीर-गुलाल, पिचकारियां खरीदी जा रही हैं तो घरों में स्वादिष्ट गुझिया भी बन रही है। हर तरफ हंसी-खुशी का माहौल और रंग बरसे… की धुन सुनाई दे रही है। ऐसे में होलिका दहन की तैयारियों में जुटे लोगों के लिए पूजा आदि का मुहूर्त जानना जरूरी है। हमने इस बार की होली में क्या खास है और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त जानने के लिए देहरादून के द्रोण ज्योतिष निकेतन के आचार्य अनिल पांडे से विशेष बातचीत की।

आचार्य अनिल पांडे के अनुसार इस बार होली के त्योहार पर ग्रह नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। करीब 500 साल बाद इस बार होलिका दहन के समय बृहस्पति और शनि अपनी ही राशि में रहेंगे। यानी बृहस्पति जो धनु और मीन राशि का स्वामी है, इस बार वह धनु राशि में ही है। शनि जो मकर और कुंभ राशि का स्वामी है, वह इस बार मकर राशि में स्थित है। सोमवार का दिन और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र होने से ध्वज नामक योग भी रहेगा, जिससे सभी राशियों या यूं कहें कि संसार के सभी प्राणियों के लिए यश और कीर्ति प्रदान करने वाला विजयी योग बन रहा है।

आचार्य कहते हैं कि 9 मार्च को ऐसा संयोग बन रहा है कि गुरु की स्वदृष्टि चंद्रमा पर पड़ रही है, इसे गजकेसरी योग कहते हैं। होलिका का दहन सभी के लिए रोग मुक्त, शोक मुक्त और दोष मुक्त रहेगा।

अब जानिए, होलिका दहन का सही समय

आचार्य अनिल पांडे बताते हैं कि होलिका दहन के मुहूर्त की कुल अवधि आज यानी 9 मार्च को शाम पौने सात बजे से रात के सवा 11 बजे तक है। हालांकि पौने सात से 9 बजे तक का समय शुभ मुहूर्त है। प्रदोष काल का विशेष मंगल मुहूर्त शाम को पौने 7 से 7:10 बजे तक है। खास बात यह है कि होलिका दहन के समय भद्रा काल नहीं होना चाहिए। इस बार भद्रा दोपहर 1:10 बजे समाप्त हो जा रही है।

कैसे करें पूजा

होलिका दहन से पहले पूजा का भी विधान है। पूजन सामग्री में गंगाजल या ताजा जल लें। अबीर, गुलाल, माला, रंगीन अक्षत, धूप या अगरबत्ती, फूल, गुड़, कच्चे सूत का धागा, साबुत हल्दी, मूंग, नारियल एवं नई फसल के अनाज जैसे गेंहू की बालियां, पके चने आदि पहले से जुटा लें। होलिका दहन के शुभ मुहूर्त पर चार मालाएं अर्पित करने की भी परंपरा है। एक माला पितरों के नाम से, दूसरी हनुमान जी के, तीसरी शीतला माता और चौथी परिवार के नाम की रखी जाती है। होलिका के चारों और परिक्रमा करते हुए कच्चे सूत का धागा लपेटा जाता है। तीन या सात बार परिक्रमा करने के बाद पूजा सामग्रियों को होलिका को एक-एक अर्पित करें। जल से अर्घ्य दें।

इस दौरान प्रार्थना की जाती है कि हमारे भीतर नफरत और जो भी बुराइयां हैं, वे खत्म हों। लोग अग्नि के सामने अन्न की बर्बादी न करने, नशा छोड़ने आदि का संकल्प भी ले सकते हैं। सब अपने विचार के हिसाब से हंसी-खुशी मिलजुलकर रहें क्योंकि होली तो मेलजेल बढ़ाने का ही त्योहार है।

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Hill Mail

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