[fvplayer id=”10″]
दिल्ली-एनसीआर में बसे प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी मातृभाषा और लोकसंस्कृति को जीवित रखने का एक अनूठा अभियान पिछले 15 वर्षों से लगातार चल रहा है। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाएं हर वर्ष आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2012 से शुरू हुई यह पहल आज एक विशाल सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
READ MOREउत्तराखंड को कभी जल स्रोतों की धरती कहा जाता था। यहां के पहाड़ों से निकलने वाले प्राकृतिक नौले, धारे, गदेरे और झरने गांवों की जीवनरेखा थे। लेकिन आज वही जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। राज्य के कई गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गर्मियों के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। महिलाओं को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है और खेती-बाड़ी भी प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और भयावह रूप ले सकता है।
READ MOREउत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर गहरा जुड़ाव दिखाया। अपने पैतृक गांव पंचूर पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड की जागर परंपरा और लोक संस्कृति को देश की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि देवभूमि की पहचान केवल उसके मंदिरों और प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि उसकी जीवंत लोक परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना से भी है।
READ MOREभारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक वीरों ने अपने अदम्य साहस और त्याग से इतिहास रचा, उन्हीं महान विभूतियों में एक नाम है वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का। उनका जीवन केवल एक सैनिक का नहीं, बल्कि एक सच्चे मानवतावादी और क्रांतिकारी का प्रतीक है, जिन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए हर कठिनाई का सामना किया।
READ MOREमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व सीएम स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा की पावन जयंती पर उन्हें नमन किया और योजना भवन स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
READ MOREमहाविद्यालय के विकसित भारत संकल्प क्लब द्वारा बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर तीन विशेष कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। पूरे महाविद्यालय परिसर में सकारात्मक, उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण देखने को मिला।
READ MORE


[fvplayer id=”10″]

दिल्ली-एनसीआर में बसे प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी मातृभाषा और लोकसंस्कृति को जीवित रखने का एक अनूठा अभियान पिछले 15 वर्षों से लगातार चल रहा है। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाएं हर वर्ष आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2012 से शुरू हुई यह पहल आज एक विशाल सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
READ MORE
उत्तराखंड को कभी जल स्रोतों की धरती कहा जाता था। यहां के पहाड़ों से निकलने वाले प्राकृतिक नौले, धारे, गदेरे और झरने गांवों की जीवनरेखा थे। लेकिन आज वही जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। राज्य के कई गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गर्मियों के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। महिलाओं को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है और खेती-बाड़ी भी प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और भयावह रूप ले सकता है।
READ MORE