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उत्तराखंड में वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए रिज़ॉर्ट की तर्ज पर नेचुरोपैथी अस्पताल खोले जाएंगे। इन अस्पतालों में बिना दवाइयों के प्राकृतिक तरीकों से इलाज होगा। पहले चरण में चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में अस्पताल खोलने की तैयारी है।
READ MOREउत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय के लिए केंद्र सरकार ने भूमि की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। हल्द्वानी वन प्रभाग की 12.317 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर विश्वविद्यालय बनेगा। राज्य सरकार 2026 से कक्षाएं शुरू करने की तैयारी में है, जिससे प्रदेश के खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिलेगा।
READ MOREउत्तराखंड के एक दूरस्थ गांव में सड़क निर्माण की स्वीकृति के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन पाई। नतीजा यह है कि बीमार मरीजों को पांच किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। यह घटना पहाड़ी इलाकों में विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।
READ MOREउत्तराखंड सरकार ने पीआरडी जवानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सामान्य ड्यूटी में मृत्यु पर मुआवज़ा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख किया गया है, जबकि अत्यंत संवेदनशील ड्यूटी में मृत्यु होने पर 75 हजार की जगह 1.50 लाख रुपए दिए जाएंगे। CM धामी ने स्थापना दिवस समारोह में इसकी घोषणा की।
READ MOREरामनगर के कोसी और दाबका नदी क्षेत्र में भूकंप से बड़ा भू-परिवर्तन संभव है। वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी भी बड़े भूकंप की स्थिति में दाबका नदी का बहाव बदलकर कोसी से मिल सकता है। आईआईटी कानपुर और वैज्ञानिकों की नई स्टडी में फॉल्ट लाइन पर बड़े निर्माण को गंभीर खतरा बताया गया है।
READ MOREगोरखपुर के सैनिक स्कूल में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग देश को कमजोर करने की साजिश करते हैं। सीएम ने देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत के नाम पर बने भव्य ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया और उनकी प्रतिमा का अनावरण करते हुए राष्ट्र सेवा में उनके योगदान को याद किया।
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दिल्ली-एनसीआर में बसे प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी मातृभाषा और लोकसंस्कृति को जीवित रखने का एक अनूठा अभियान पिछले 15 वर्षों से लगातार चल रहा है। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाएं हर वर्ष आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2012 से शुरू हुई यह पहल आज एक विशाल सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
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उत्तराखंड को कभी जल स्रोतों की धरती कहा जाता था। यहां के पहाड़ों से निकलने वाले प्राकृतिक नौले, धारे, गदेरे और झरने गांवों की जीवनरेखा थे। लेकिन आज वही जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। राज्य के कई गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गर्मियों के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। महिलाओं को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है और खेती-बाड़ी भी प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और भयावह रूप ले सकता है।
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