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उत्तराखंड के लैंसडाउन स्थित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर (जीआरआरसी) में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर देखने को मिला, जब कुल 238 अग्निवीरों को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा ‘डिप्लोमा इन डिफेंस एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट’ से सम्मानित किया गया। औपचारिक दीक्षांत समारोह के दौरान अग्निवीरों को यह शैक्षणिक उपाधि प्रदान की गई, जो सैन्य प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा के समन्वय का एक अनूठा उदाहरण है।
READ MOREजनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने देश के नए चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में कार्यभार संभाल लिया। कार्यभार संभालने से पहले उन्होंने नेशनल वार मेमोरियल पर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी और उन्हें साउथ ब्लाक में ‘गार्ड आफ आनर’ दिया गया।
READ MOREभारतीय सेना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च मार्ग है। इसी भावना को अपने साहस, अनुशासन और समर्पण से जीवंत करने वाले वीर सैनिक हैं आदर्श नेगी। गढ़वाल राइफल्स के इस जांबाज़ जवान ने अपने कर्तव्य पालन और वीरता से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है।
READ MOREउत्तराखंड की पावन धरती ने अनेक वीर सपूतों को जन्म दिया है, जिनमें राइफलमैन जसवंत सिंह रावत का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। 19 अगस्त 1941 को पौड़ी गढ़वाल जिले के बड़यूं गांव में जन्मे जसवंत सिंह बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। मात्र 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने सेना में भर्ती होने की कोशिश की, लेकिन कम उम्र के कारण उन्हें वापस भेज दिया गया। हालांकि उनका जुनून कम नहीं हुआ और अंततः 19 अगस्त 1960 को वे भारतीय सेना में शामिल हो गए। 14 सितंबर 1961 को उनकी ट्रेनिंग पूरी हुई और जल्द ही उन्हें देश सेवा का मौका मिल गया।
READ MOREपौड़ी गढ़वाल जनपद के पाबौ विकासखंड के बूंगा गांव के आदित्य कण्डारी ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। लेफ्टिनेंट आदित्य कण्डारी की सफलता पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर मेहनत, लगन और परिवार का साथ हो तो पहाड़ के छोटे गांवों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
READ MOREलेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन का जीवन समर्पण, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की एक प्रेरणादायक कहानी है। भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा से जुड़ी गढ़वाल राइफल्स से शुरू हुआ उनका सफर आज राजभवन, बिहार तक पहुंच चुका है। यह यात्रा बताती है कि कर्तव्यनिष्ठा और मेहनत के बल पर एक सैनिक किस तरह देश के सर्वोच्च पदों तक अपनी पहचान बना सकता है।
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उत्तराखंड के लैंसडाउन स्थित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर (जीआरआरसी) में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर देखने को मिला, जब कुल 238 अग्निवीरों को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा ‘डिप्लोमा इन डिफेंस एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट’ से सम्मानित किया गया। औपचारिक दीक्षांत समारोह के दौरान अग्निवीरों को यह शैक्षणिक उपाधि प्रदान की गई, जो सैन्य प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा के समन्वय का एक अनूठा उदाहरण है।
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