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उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से पैदा होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने निगरानी व्यवस्था को हाईटेक करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की स्थिति पर लगातार और रियल टाइम नजर रखी जाएगी। इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और सेंसर आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य झीलों में होने वाले बदलावों की जानकारी समय रहते हासिल करना और संभावित आपदा से पहले प्रभावित आबादी को सतर्क करना है।
READ MOREउत्तराखंड में मानसून के कारण धीमी पड़ी चारधाम यात्रा अब सितंबर के मध्य से फिर रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। यात्रा के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के लिए हेली सेवाएं दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। हेली सेवाओं का संचालन 15 सितंबर 2026 से शुरू होगा, जबकि इसके लिए टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग 7 सितंबर से शुरू की जाएगी।
READ MOREरुद्रप्रयाग जिले के तूना बोंठा गांव निवासी दिव्यांश कप्रवाण ने अपनी शानदार प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए 24वीं उत्तराखंड शूटिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। देहरादून में आयोजित इस प्रतियोगिता में दिव्यांश ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, गांव और पूरे रुद्रप्रयाग जिले में खुशी का माहौल है।
READ MOREउत्तराखंड विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। चारधाम यात्रा के साथ-साथ राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में जागेश्वर धाम और त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या ढाई गुना तक बढ़ी है, जबकि धारी देवी में लगभग दोगुनी और पूर्णागिरि धाम में करीब डेढ़ गुना वृद्धि हुई है।
READ MOREउत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बुग्यालों में आठ वर्षों बाद एक बार फिर पर्यटक रात्रि विश्राम (नाइट स्टे) कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद लंबे समय से लागू प्रतिबंध हट गया है, जिससे राज्य के पर्वतीय पर्यटन, ट्रैकिंग गतिविधियों और स्थानीय लोगों की आजीविका को नई उम्मीद मिली है। इस निर्णय के बाद रूपकुंड, बेदनी बुग्याल, आली-बगजी बुग्याल समेत कई प्रसिद्ध उच्च हिमालयी घास के मैदानों में पर्यटन गतिविधियों के दोबारा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
READ MOREएक साल बाद भी नहीं बनी क्षतिग्रस्त नहर, बीमा सुविधा न मिलने से बढ़ी चिंता रुद्रप्रयाग जनपद के बसुकेदार क्षेत्र स्थित ग्राम किमाणा खाटली की महिला मत्स्य पालक मीना देवी को पानी की कमी के कारण भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उनके ट्राउट मत्स्य पालन केंद्र में इस सप्ताह करीब 6,000 ट्राउट मछलियों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने के कारण मछलियां जीवित नहीं रह सकीं। इस घटना से मीना देवी की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
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उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से पैदा होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने निगरानी व्यवस्था को हाईटेक करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की स्थिति पर लगातार और रियल टाइम नजर रखी जाएगी। इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और सेंसर आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य झीलों में होने वाले बदलावों की जानकारी समय रहते हासिल करना और संभावित आपदा से पहले प्रभावित आबादी को सतर्क करना है।
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उत्तराखंड में मानसून के कारण धीमी पड़ी चारधाम यात्रा अब सितंबर के मध्य से फिर रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। यात्रा के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के लिए हेली सेवाएं दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। हेली सेवाओं का संचालन 15 सितंबर 2026 से शुरू होगा, जबकि इसके लिए टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग 7 सितंबर से शुरू की जाएगी।
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