एक साल बाद भी नहीं बनी क्षतिग्रस्त नहर, बीमा सुविधा न मिलने से बढ़ी चिंता रुद्रप्रयाग जनपद के बसुकेदार क्षेत्र स्थित ग्राम किमाणा खाटली की महिला मत्स्य पालक मीना देवी को पानी की कमी के कारण भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उनके ट्राउट मत्स्य पालन केंद्र में इस सप्ताह करीब 6,000 ट्राउट मछलियों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने के कारण मछलियां जीवित नहीं रह सकीं। इस घटना से मीना देवी की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मीना देवी ने बताया कि 26 अगस्त 2025 को आई अतिवृष्टि और आपदा में उनके मत्स्य पालन विभाग की सहायता से बने तालाब पूरी तरह बह गए थे। इसके बाद विभाग की मदद से दोबारा चार रेसवे और दो कच्चे तालाब तैयार किए गए। इनमें लगभग 8,000 ट्राउट मछलियों का पालन शुरू किया गया था और अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। लेकिन पानी की पर्याप्त उपलब्धता न होने से इनमें से लगभग 6,000 मछलियां मर गईं।
उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान लघु सिंचाई विभाग की नहर भी क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे मत्स्य तालाबों तक नियमित जलापूर्ति बंद हो गई। घटना के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नहर का पुनर्निर्माण नहीं कराया गया है। मजबूरी में उन्होंने अपने स्तर पर करीब 19 हजार रुपये खर्च कर एचडीपीई पाइप खरीदे और पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया, लेकिन यह व्यवस्था भी पर्याप्त साबित नहीं हुई।
मीना देवी का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई। तहसील दिवस, जनता दरबार और प्रभारी मंत्री तक अपनी शिकायत पहुंचाई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। उनका कहना है कि यदि समय रहते नहर का निर्माण कर दिया जाता तो इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत नहीं होती और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता था।
उन्होंने मत्स्य पालन विभाग को घटना की जानकारी देते हुए नुकसान का आकलन कराने और बीमा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की है। हालांकि विभाग की ओर से बताया गया कि ट्राउट मछलियों के लिए बीमा प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। ऐसे में उन्हें किसी प्रकार का बीमा लाभ मिलने की संभावना फिलहाल नहीं है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
दूसरी ओर, लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मोहन लाल ने बताया कि क्षतिग्रस्त नहर के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव राज्य योजना के अंतर्गत भेजा गया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही बजट स्वीकृत होगा, नहर का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा ताकि क्षेत्र के मत्स्य पालकों और किसानों को दोबारा नियमित जलापूर्ति मिल सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में ट्राउट मत्स्य पालन स्वरोजगार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। यदि सिंचाई और जलापूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं का समय पर रखरखाव नहीं किया गया तो इससे मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की सरकारी योजनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। प्रभावित मत्स्य पालकों ने प्रशासन से शीघ्र राहत, मुआवजा और सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।








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