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उत्तराखंड के पहाड़ों से रोजगार की तलाश में हो रहे पलायन को रोकने के लिए स्वरोजगार और आधुनिक खेती को सबसे प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। पौड़ी जिले के बीरोंखाल विकासखंड के सीमांत गांव जमरिया के दो किसान सुरेंद्र सिंह रावत और मंगल सिंह चौधरी इस सोच को वास्तविकता में बदल रहे हैं। दोनों किसानों ने आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर सेब बागवानी में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आज वे न केवल अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
READ MOREउत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ऐपण कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपण कला पर आधारित भगवान शिव की कलाकृति भेंट कर दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने का संदेश दिया। इस विशेष उपहार ने न केवल उत्तराखंड की पारंपरिक लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को भी विश्व पटल पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
READ MOREप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तीन देशों की विदेश यात्रा के दौरान भारत की सांस्कृतिक विरासत और खेल उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर विशेष पहचान दिलाते हुए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी टोपी और भारतीय महिला हॉकी टीम की सभी खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाली हॉकी स्टिक भेंट की। इन प्रतीकात्मक उपहारों ने भारत की समृद्ध परंपराओं, हस्तशिल्प और खेल संस्कृति का प्रभावशाली परिचय दुनिया के सामने रखा।
READ MOREउत्तराखंड के पहाड़ी गांव आज केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई कहानियों के लिए भी पहचाने जाने लगे हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी और स्वरोजगार योजनाएं ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी जनपद रुद्रप्रयाग के लदोली गांव निवासी दिनेश सिंह चौधरी की है, जिन्होंने शहर की सुविधाजनक लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी छोड़कर अपने गांव लौटने का साहसिक निर्णय लिया और ट्राउट मत्स्य पालन के माध्यम से न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अन्य युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा बन गए।
READ MOREउत्तराखंड के यमकेश्वर क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार मनजीत नेगी की पहल पर आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम ने भारत और जापान के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की। जापान के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु श्री बाला कुंभ गुरु मुनि (ताकायुकी होशी) अपने दो दिवसीय उत्तराखंड प्रवास के दौरान यमकेश्वर विकासखंड के तल्ला बनास पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण, महिलाएं और युवा शामिल हुए तथा गुरु मुनि के आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात किया।
READ MOREउत्तराखंड के चम्पावत जनपद के लिए गर्व का क्षण तब आया, जब जिले के लटोली गांव निवासी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गजेंद्र जोशी को राष्ट्र के प्रति उनकी उत्कृष्ट, विशिष्ट और दीर्घकालिक सैन्य सेवाओं के लिए भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य सम्मानों में से एक परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किया गया। इस उपलब्धि के साथ लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने न केवल चम्पावत बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
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उत्तराखंड के पहाड़ों से रोजगार की तलाश में हो रहे पलायन को रोकने के लिए स्वरोजगार और आधुनिक खेती को सबसे प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। पौड़ी जिले के बीरोंखाल विकासखंड के सीमांत गांव जमरिया के दो किसान सुरेंद्र सिंह रावत और मंगल सिंह चौधरी इस सोच को वास्तविकता में बदल रहे हैं। दोनों किसानों ने आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर सेब बागवानी में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आज वे न केवल अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
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उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ऐपण कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपण कला पर आधारित भगवान शिव की कलाकृति भेंट कर दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने का संदेश दिया। इस विशेष उपहार ने न केवल उत्तराखंड की पारंपरिक लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को भी विश्व पटल पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
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