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उत्तराखंड की होनहार एथलीट और ओलंपियन अंकिता ध्यानी ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए अंकिता ने न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि सितंबर में जापान में आयोजित होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए भी क्वालिफाई कर लिया। उनकी इस उपलब्धि से पूरे उत्तराखंड में खुशी की लहर है और खेल प्रेमियों ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है।
READ MOREउत्तराखंड की प्रतिभाएं लगातार खेल, शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मेहनत और लगन के दम पर नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। इसी कड़ी में पौड़ी गढ़वाल जनपद के तल्ला (पैठाणी) गांव के 22 वर्षीय युवा धावक कुलदीप नेगी ने अपनी शानदार उपलब्धि से पूरे गढ़वाल और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। कुलदीप ने अल्मोड़ा हाफ मैराथन के ओपन वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने 21.1 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण दौड़ मात्र 1 घंटा 16 मिनट में पूरी कर अपनी फिटनेस, अनुशासन और कड़ी मेहनत का शानदार परिचय दिया।
READ MOREउत्तराखंड की ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू होने जा रही है। अब पहाड़ों में तैयार होने वाले पारंपरिक खाद्य उत्पाद, मसाले, जड़ी-बूटियां और हस्तशिल्प केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि प्रदेश के व्यस्त पेट्रोल पंपों के माध्यम से देशभर के पर्यटकों और उपभोक्ताओं तक पहुंचेंगे। देहरादून जिला प्रशासन और रीप (REAP) परियोजना ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसीएल) के सहयोग से एक अभिनव योजना शुरू की है, जिसके तहत पेट्रोल पंपों पर ‘हिलान्स आउटलेट’ स्थापित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को स्थायी और व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है।
READ MOREउत्तराखंड के पहाड़ों से रोजगार की तलाश में होने वाला पलायन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। लेकिन अब कुछ युवा अपनी प्रतिभा, नवाचार और दृढ़ संकल्प से इस सोच को बदल रहे हैं। टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर क्षेत्र के कली गांव निवासी रमेश भद्री ने विज्ञान को स्वरोजगार से जोड़ते हुए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो न केवल स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, बल्कि रिवर्स माइग्रेशन की नई संभावनाओं को भी मजबूत कर रही है। आज रमेश देश के जाने-माने शौकिया खगोलविद (एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर), एस्ट्रोफोटोग्राफर और एस्ट्रो टूरिज्म उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
READ MOREउत्तराखंड ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। राज्य गठन के बाद पहली बार उत्तराखंड में उत्पादित रेनबो ट्राउट मछली ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाई है। पिथौरागढ़ जिले की तीन मत्स्यजीवी सहकारी समितियों द्वारा तैयार की गई पांच मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली का सफलतापूर्वक नेपाल को निर्यात किया गया है। इस उपलब्धि को राज्य के मत्स्य क्षेत्र के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। सरकार अब आने वाले दिनों में करीब 30 मीट्रिक टन मछली के निर्यात की तैयारी में जुट गई है।
READ MOREउत्तराखंड पुलिस ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड पुलिस को प्रतिष्ठित “इंस्टीट्यूशनल परफॉर्मेंस अवार्ड फॉर स्टेट पुलिस” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने उत्तराखंड पुलिस की ओर से एडीजी प्रशासन एपी अंशुमान को प्रदान किया।
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उत्तराखंड के पहाड़ों से रोजगार की तलाश में हो रहे पलायन को रोकने के लिए स्वरोजगार और आधुनिक खेती को सबसे प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। पौड़ी जिले के बीरोंखाल विकासखंड के सीमांत गांव जमरिया के दो किसान सुरेंद्र सिंह रावत और मंगल सिंह चौधरी इस सोच को वास्तविकता में बदल रहे हैं। दोनों किसानों ने आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर सेब बागवानी में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आज वे न केवल अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
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उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ऐपण कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपण कला पर आधारित भगवान शिव की कलाकृति भेंट कर दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने का संदेश दिया। इस विशेष उपहार ने न केवल उत्तराखंड की पारंपरिक लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को भी विश्व पटल पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
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