इस ऐतिहासिक अभियान के दौरान महिला अधिकारियों ने हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और दक्षिण अटलांटिक महासागर की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया। अभियान का उद्देश्य केवल समुद्री यात्रा पूरी करना नहीं था, बल्कि भारतीय महिलाओं की क्षमता, साहस, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन भी करना था। कठिन मौसम, तेज हवाओं और ऊंची समुद्री लहरों के बीच नौका को सुरक्षित आगे बढ़ाना दल के लिए बड़ी चुनौती रहा।
कई देशों में किया पड़ाव
अभियान के दौरान दल ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में महत्वपूर्ण पड़ाव किए। नौका ऑस्ट्रेलिया के फ्रेमैंटल, न्यूजीलैंड के लिटलटन, अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन पहुंची। इस दौरान दल ने भूमध्य रेखा को दो बार पार किया। इसके अलावा विश्व के चुनौतीपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में शामिल केप लीविन और केप हॉर्न को भी पार किया गया।
समुद्र की बदलती परिस्थितियों के बीच लंबे समय तक नौका पर रहना अपने आप में एक कठिन परीक्षा थी। तेज हवाओं, ऊंची लहरों और प्रतिकूल मौसम के बीच दल ने संयम, अनुशासन और टीमवर्क के साथ अभियान को आगे बढ़ाया। लगभग 10 महीने बाद दल मुंबई पहुंचा, जहां उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि का भव्य स्वागत किया गया।
रक्षा मंत्री ने किया स्वागत, राष्ट्रपति से भी मिलीं
मुंबई लौटे दल का पिछले माह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी अभियान में शामिल महिला अधिकारियों से मुलाकात की और उनकी असाधारण उपलब्धि की सराहना की। इस उपलब्धि को भारतीय महिलाओं के साहस और देश की समुद्री क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैशाली भंडारी की इस सफलता से देहरादून और उत्तराखंड में भी गर्व का माहौल है। उनके परिवार, शिक्षकों और परिचितों के लिए यह उपलब्धि विशेष मायने रखती है। वैशाली ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दून इंटरनेशनल स्कूल और केंद्रीय विद्यालय ओएनजीसी से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने डीएवी पीजी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
वायुसेना से समुद्र तक साहस की मिसाल
स्नातक शिक्षा के बाद वैशाली ने हैदराबाद स्थित वायुसेना अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्हें भारतीय वायुसेना की अकाउंट्स शाखा में अधिकारी के रूप में कमीशन मिला। वायुसेना में अपने दायित्वों के साथ उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण समुद्री अभियान में हिस्सा लेकर अपने साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया।
वैशाली भंडारी की कहानी उन युवतियों के लिए प्रेरणा है, जो पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर नई चुनौतियों को स्वीकार करना चाहती हैं। दून की इस बेटी ने आसमान से लेकर समुद्र तक अपने हौसले की पहचान बनाई है। 25,500 नॉटिकल मील की यह यात्रा केवल एक समुद्री परिक्रमा नहीं, बल्कि भारतीय महिलाओं की क्षमता, आत्मविश्वास और जज्बे की भी ऐतिहासिक कहानी बन गई है।


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