पहाड़ों की ओर लौटने के अभियान के रूप में शुरू हुई हिल-मेल की यात्रा
पहाड़ों की ओर लौटने के अभियान के उद्देश्य से वर्ष 2013 में हिल-मेल वेबसाइट की शुरुआत हुई। इन वर्षों में हिल-मेल ने पहाड़ और उत्तराखंड से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को अपनी वेबसाइट और मासिक पत्रिका ‘हिल-मेल’ के माध्यम से प्रमुखता से उठाने का निरंतर प्रयास किया है।
हिल-मेल कई वर्षों से उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों पर सेमिनार, विचार-गोष्ठियों और संवाद कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है। 1 मार्च 2014 को हिल-मेल ने केदारनाथ आपदा को लेकर ऋषिकेश में एक सेमिनार का आयोजन किया। इसके बाद 9 मई 2015 को नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में विचार-गोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने पहाड़ों में आपदा प्रबंधन और भविष्य की तैयारियों को लेकर अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर हिल-मेल ने ‘केदारनाथ आपदा और आगे का रास्ता’ शीर्षक से एक विजन डॉक्यूमेंट भी प्रस्तुत किया, जिसमें आपदा के बाद पुनर्निर्माण, आपदा प्रबंधन और उत्तराखंड के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव रखे गए।
फरवरी 2016 में हिल-मेल ने अपनी मासिक पत्रिका ‘हिल-मेल’ की शुरुआत की। पत्रिका के माध्यम से हम लगातार उत्तराखंड के सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय, पर्यटन, विकास और सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दों को सामने लाते रहे हैं।
वर्ष 2017 में हिल-मेल के बैनर तले ‘रैबार’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य उत्तराखंड के प्रवासी लोगों, विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले लोगों को एक मंच पर लाकर उत्तराखंड के विकास और भविष्य से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद करना है। रैबार के मंच पर इस बात पर भी चर्चा होती है कि उत्तराखंड को किस तरह अधिक समृद्ध, सशक्त और विकसित राज्य बनाया जा सकता है।
अब तक हिल-मेल सात रैबार कार्यक्रमों का सफल आयोजन कर चुका है। इन कार्यक्रमों में देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया है तथा रैबार के मंच से उत्तराखंड से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार देश-दुनिया तक पहुंचाए हैं।
बदलते दौर और सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को देखते हुए हिल-मेल ने मई 2026 में देहरादून से अपने यूट्यूब चैनल की शुरुआत की। बहुत कम समय में हजारों दर्शक और सब्सक्राइबर हिल-मेल के साथ जुड़े हैं। वहीं, हिल-मेल के फेसबुक पेज पर दो लाख से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं।
वेबसाइट, मासिक पत्रिका, रैबार जैसे संवाद मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से हिल-मेल का प्रयास लगातार यही रहा है कि पहाड़ की आवाज को मजबूती से उठाया जाए, उत्तराखंड से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक संवाद हो और पहाड़ों के विकास की दिशा में सकारात्मक सोच को आगे बढ़ाया जाए।
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