कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस के कार्यक्रम स्थल का ‘शुद्धिकरण’ केवल कांग्रेस का अपमान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की साझा संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक परंपराओं का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारों का विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी राजनीतिक कार्यक्रम स्थल को ‘अशुद्ध’ बताकर उसका शुद्धिकरण करना सामाजिक विभाजन की मानसिकता को बढ़ावा देता है।
प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और सांझी संस्कृति से है। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि यदि सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती है तो ऐसी कथित विभाजनकारी मानसिकता के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना होगा कि वह संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खड़ी है या समाज को बांटने वाली ताकतों के साथ।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हल्द्वानी की घटना लोकतंत्र और उत्तराखंड की सामाजिक चेतना पर हमला है। कांग्रेस धर्म और जाति के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को ‘शुद्ध’ और ‘अशुद्ध’ बताने की मानसिकता संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से पूरे प्रकरण पर जवाब देने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति विकास के मुद्दों से हटकर समाज में विभाजन पैदा करने की ओर बढ़ रही है। चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड को नफरत और भेदभाव की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा।
CWC सदस्य एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने कहा कि कांग्रेस कार्यक्रम स्थल का कथित ‘शुद्धिकरण’ राजनीतिक विरोध को सामाजिक वैमनस्य में बदलने वाली सोच को दर्शाता है। राष्ट्रीय महासचिव एवं CWC सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का विरोध किया जा सकता है, लेकिन किसी राजनीतिक कार्यक्रम को ‘अशुद्ध’ बताना लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है।
उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और विधायक विक्रम सिंह नेगी ने भी सरकार से हल्द्वानी प्रकरण में कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विरोध केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता के खिलाफ है जो राजनीतिक असहमति को धर्म, जाति और कथित शुद्ध-अशुद्ध के आधार पर देखती है।
इस दौरान कांग्रेस ने महिला अपराध, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, किसानों की समस्याओं, जमीनों की अनियंत्रित नीलामी और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की जनता नफरत नहीं, भाईचारा और भेदभाव नहीं, समानता चाहती है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ प्रकरण में न्याय और दोषियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के कई स्थापित नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। सभा का संचालन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने किया।


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