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उत्तराखंड की नदियाँ अवैध खनन के कारण भीतर से खोखली होती जा रही हैं। नदी तल से छेड़छाड़ ने बाढ़, भूस्खलन और गाँवों की असुरक्षा को बढ़ा दिया है। केदारनाथ से जोशीमठ तक की आपदाएँ चेतावनी हैं कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश भविष्य को संकट में डाल रहा है।
READ MOREयोगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को भय और अराजकता की पहचान से निकालकर व्यवस्था और विश्वास की राह पर खड़ा किया। कानून व्यवस्था, विकास और संस्कृति के संतुलन के साथ उन्होंने शासन को साधना बनाया। उनका नेतृत्व लोकप्रियता नहीं, परिणाम और चरित्र से पहचाना जाता है।
READ MOREसीडीएस जनरल अनिल चौहान का नेतृत्व शांति, स्पष्ट सोच और दूरदृष्टि पर आधारित है। वे युद्ध को हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, समन्वय और रणनीति से जीतने में विश्वास रखते हैं। तीनों सेनाओं के एकीकरण के जरिए वे भारत की सैन्य शक्ति को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।
READ MORE30 साल पैरा SF में सेवा के बाद कमांडो हीरा सिंह पटवाल अल्मोड़ा के अपने गांव लौटे। बंजर ज़मीन को खेती में बदला, पशुपालन शुरू किया और आत्मनिर्भरता की मिसाल बने। वे युवाओं को गांव लौटने, खेती अपनाने और पहाड़ बचाने का संदेश दे रहे हैं।
READ MOREदिल्ली की नौकरी छोड़ पहाड़ लौटे संदीप पांडेय ने 160 रुपये से HimFla की शुरुआत की। पारंपरिक पिस्यूं लूण से जन्मा यह ब्रांड आज 1.5 करोड़ टर्नओवर के साथ ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मसम्मान दे रहा है। यह कहानी जिद, जड़ों और आत्मनिर्भरता की मिसाल है।
READ MOREटिहरी जिले के स्यांड़ी गांव की महिलाओं ने पहाड़ के शुद्ध पानी को रोजगार का साधन बना लिया है। ‘देवभूमि शुद्ध धारा’ नाम से मिनरल वाटर प्लांट शुरू कर 11 महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। यह पहल स्थानीय रोजगार और जल संरक्षण का सशक्त उदाहरण है।
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कहा जाता है कि यदि इंसान के इरादे मजबूत हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो कोई भी मुश्किल राह सफलता का रास्ता बन जाती है। ऋषिकेश की रहने वाली मीनाक्षी भाटिया ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। साधारण परिवार से आने वाली मीनाक्षी ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की पीसीएस परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए एसडीएम पद पर चयन प्राप्त किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है।
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विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए जल्द ही एक बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है। अब तीर्थयात्रियों को कड़ाके की ठंड में गर्म पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। केदारनाथ धाम में बायोमास पैलेट्स से संचालित विशेष गीजरों के माध्यम से 24 घंटे गर्म पानी उपलब्ध कराने की अभिनव योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है। यह देश का पहला ऐसा प्रयोग माना जा रहा है, जिसमें समुद्र तल से लगभग 11,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित क्षेत्र में चौबीसों घंटे गर्म पानी की व्यवस्था की जाएगी।
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