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उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की पीसीएस परीक्षा के परिणामों ने इस बार गढ़वाल मंडल के युवाओं को बड़ी खुशियां दी हैं। पौड़ी जिले के उल्ली गांव के युवा विपिन सिंह ने राज्य कर अधिकारी (एसटीओ) पद पर प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर न केवल अपने जिले बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। वहीं टिहरी जिले के तीन प्रतिभाशाली युवाओं अंजलि नेगी, अभिषेक कंडारी और मनीष मोहन नेगी ने भी पीसीएस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रशासनिक सेवाओं में जगह बनाई है।
READ MOREपहाड़ों में उगने वाला माल्टा वर्षों से स्थानीय लोगों की आजीविका और संस्कृति का हिस्सा रहा है, लेकिन अब यही माल्टा ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का नया माध्यम बन गया है। पौड़ी जिले में ग्रामोत्थान परियोजना के तहत शुरू की गई अभिनव पहल ने माल्टा के बेकार समझे जाने वाले छिलकों को रोजगार और आय का जरिया बना दिया है। यहां महिलाएं माल्टा के छिलकों से हर्बल कॉस्मेटिक उत्पाद तैयार कर न केवल अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का भी उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
READ MOREउत्तराखंड लोक सेवा आयोग (पीसीएस) परीक्षा के परिणामों ने प्रदेश की दो प्रतिभाशाली बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी है। हरिद्वार जिले के झबरेड़ा क्षेत्र के सड़ौली गांव की काजल सैनी ने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर एसडीएम पद हासिल किया है, जबकि चमोली मूल की बिनीता रावत उप शिक्षा अधिकारी संवर्ग में शीर्ष स्थान प्राप्त कर चर्चा में हैं। दोनों की सफलता संघर्ष, मेहनत और परिवार के सहयोग की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।
READ MOREहिमाचल प्रदेश सरकार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कमलेश कुमार पंत को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। राज्यपाल की ओर से जारी आदेश के अनुसार उन्हें तत्काल प्रभाव से मुख्य सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
READ MOREउत्तराखंड की पहाड़ों भरी धरती पर जहां खेती लंबे समय से जीवन का आधार रही है, वहीं अब आधुनिक बागवानी और नई फसलों की ओर भी लोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव की सबसे प्रेरणादायक मिसाल बनी हैं टिहरी जिले की रहने वाली सीता देवी, जिन्हें आज पूरे क्षेत्र में “कीवी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। अपनी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि पहाड़ की महिलाओं और किसानों के लिए भी एक नई राह खोल दी।
READ MOREदिल्ली-एनसीआर में बसे प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी मातृभाषा और लोकसंस्कृति को जीवित रखने का एक अनूठा अभियान पिछले 15 वर्षों से लगातार चल रहा है। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाएं हर वर्ष आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2012 से शुरू हुई यह पहल आज एक विशाल सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
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सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच यदि हौसले बुलंद हों, तो सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचना संभव है। चमोली जिले के कर्णप्रयाग निवासी अनुराग पुरोहित ने इसका प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल के पूर्व छात्र अनुराग ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में 720 में से 655 अंक प्राप्त करते हुए 99.93 पर्सेंटाइल हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1202 प्राप्त कर अपने परिवार, विद्यालय और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
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उत्तराखंड के पहाड़ों से रोजगार की तलाश में हो रहे पलायन को रोकने के लिए स्वरोजगार और आधुनिक खेती को सबसे प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। पौड़ी जिले के बीरोंखाल विकासखंड के सीमांत गांव जमरिया के दो किसान सुरेंद्र सिंह रावत और मंगल सिंह चौधरी इस सोच को वास्तविकता में बदल रहे हैं। दोनों किसानों ने आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर सेब बागवानी में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आज वे न केवल अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
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