उत्तराखंड की पहाड़ों भरी धरती पर जहां खेती लंबे समय से जीवन का आधार रही है, वहीं अब आधुनिक बागवानी और नई फसलों की ओर भी लोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव की सबसे प्रेरणादायक मिसाल बनी हैं टिहरी जिले की रहने वाली सीता देवी, जिन्हें आज पूरे क्षेत्र में “कीवी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। अपनी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि पहाड़ की महिलाओं और किसानों के लिए भी एक नई राह खोल दी।
सीता देवी पहले पारंपरिक खेती करती थीं। सीमित आय और कठिन परिस्थितियों के बीच परिवार का पालन-पोषण करना आसान नहीं था। पहाड़ों में खेती हमेशा मौसम और संसाधनों की चुनौतियों से घिरी रहती है। ऐसे समय में उन्होंने कुछ अलग करने का निश्चय किया। जब उन्होंने कीवी उत्पादन की शुरुआत करने का फैसला लिया, तो गांव और आसपास के कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। लोगों को लगा कि पहाड़ों में यह प्रयोग सफल नहीं होगा। लेकिन सीता देवी ने हार नहीं मानी।
नई खेती को समझने और सीखने के लिए उन्होंने हिमाचल प्रदेश जाकर प्रशिक्षण लिया। वहां उन्होंने कीवी उत्पादन की तकनीक, पौधों की देखभाल और आधुनिक बागवानी के तरीके सीखे। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने खेतों में कीवी के पौधे लगाए। शुरुआत आसान नहीं थी। सीमित संसाधनों, कठिन मेहनत और लोगों की आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखा।
धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी। खेतों में लगे कीवी के पौधे फल देने लगे और उनकी फसल ने शानदार उत्पादन दिया। बाजार में अच्छी मांग मिलने के कारण सीता देवी को कीवी खेती से लाखों रुपये का लाभ होने लगा। आज उनकी पहचान केवल एक किसान के रूप में नहीं, बल्कि एक सफल महिला उद्यमी के रूप में भी होती है।
उनके खेत अब पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। दूर-दूर से किसान उनके खेत देखने आते हैं और कीवी उत्पादन के बारे में जानकारी लेते हैं। उनकी सफलता को देखकर अब कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर कीवी की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। खासतौर पर ग्रामीण महिलाएं उनसे प्रेरणा लेकर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं।
सीता देवी की कहानी यह साबित करती है कि यदि आत्मविश्वास, मेहनत और सीखने की लगन हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। उन्होंने यह संदेश दिया है कि पहाड़ की महिलाएं केवल घर और खेत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नए प्रयोगों और आधुनिक खेती के जरिए आर्थिक बदलाव ला सकती हैं।
आज सीता देवी अन्य किसानों को भी नई खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और कृषि को व्यवसाय के रूप में देखने की सीख देती हैं। उनकी सफलता ने ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास को नई मजबूती दी है।
सीता देवी की यह प्रेरक यात्रा उत्तराखंड की बेटियों के लिए उम्मीद, साहस और संघर्ष का प्रतीक बन चुकी है। उनकी कहानी यह बताती है कि कठिन रास्तों पर भी मेहनत और धैर्य से सफलता की नई मंजिलें हासिल की जा सकती हैं।








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