इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चीड़ की सूखी पत्तियों (पिरुल) और केदारनाथ पैदल मार्ग पर संचालित खच्चरों की लीद से बायोमास फायर पैलेट्स तैयार किए जाएंगे। इन पैलेट्स का उपयोग न केवल गर्म पानी उपलब्ध कराने के लिए होगा, बल्कि इन्हें ऊर्जा स्रोत के रूप में भी इस्तेमाल किया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत केदारनाथ पैदल मार्ग पर खच्चरों की लीद का संग्रहण सुलभ इंटरनेशनल के माध्यम से किया जाएगा। वहीं, रुद्रप्रयाग जिले के जंगलों से पिरुल का संग्रह स्वयं सहायता समूहों (SHG) द्वारा किया जा रहा है। इन दोनों प्राकृतिक संसाधनों को मिलाकर विशेष प्रकार के फायर पैलेट्स तैयार किए जाएंगे, जो स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन का कार्य करेंगे।
बायोमास स्टोव और फायर पैलेट्स को केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चयनित ढाबा संचालकों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ढाबा संचालकों को पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और ऊर्जा संकट की स्थिति में भी उन्हें स्वच्छ एवं सुलभ ईंधन मिलता रहेगा। साथ ही श्रद्धालुओं को गर्म पेयजल और अन्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
केदारनाथ धाम में अक्सर अत्यधिक ठंड के कारण गर्म पानी की कमी महसूस की जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए सोनप्रयाग स्थित बायोमास पैलेट उत्पादन इकाई में तैयार किए गए पैलेट्स से संचालित गीजर स्थापित किए जाएंगे। इन गीजरों के माध्यम से चौबीसों घंटे गर्म पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
एक वर्ष के ट्रायल के रूप में शुरू की जा रही इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए पर्यावरण संरक्षण और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है। इसके अलावा यह पहल स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिरुल के उपयोग से जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में इसे अन्य उच्च हिमालयी तीर्थस्थलों और पर्यटन क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।
केदारनाथ धाम में शुरू होने जा रही यह अनूठी पहल स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और तीर्थयात्रियों की सुविधा के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित कर सकती है।


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