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पर्यावरण संरक्षण के प्रहरी शंकर सिंह बिष्ट को मिलेगा प्रतिष्ठित गौरा देवी सम्मान

पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्रकृति संरक्षण की मिसाल कायम करने वाले चौखुटिया के पर्यावरण प्रेमी शंकर सिंह बिष्ट को इस वर्ष प्रतिष्ठित गौरा देवी सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें 6 जून को चमोली जिले की जोशीमठ स्थित उरगम घाटी के हिमल क्षेत्र में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा। उनके चयन से क्षेत्र में खुशी का माहौल है और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इसे जनभागीदारी आधारित प्रयासों की बड़ी उपलब्धि बताया है।

गौरा देवी सम्मान उन व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने पर्यावरण, वन, वन्यजीव, जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हो। उत्तराखंड में यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित पहचान माना जाता है। इस सम्मान का नाम प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और चिपको आंदोलन की प्रेरणास्रोत गौरा देवी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने जंगलों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया था।

मूल रूप से चौखुटिया विकासखंड के चनोला गांव निवासी शंकर सिंह बिष्ट बचपन से ही प्रकृति के बेहद करीब रहे हैं। पहाड़ के प्राकृतिक परिवेश में पले-बढ़े शंकर बिष्ट ने बचपन से जल स्रोतों, जंगलों और पर्यावरण के महत्व को समझा। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने शहरों की ओर रुख करने के बजाय अपने गांव लौटकर पर्यावरण संरक्षण को अपना मिशन बनाया।

उन्होंने अपने साथियों के सहयोग से हिमगिरि परिवार और हिमगिरि वॉरियर्स जैसी संस्थाओं की स्थापना की, जिनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के अनेक अभियान संचालित किए गए। उनके नेतृत्व में किए गए कार्यों ने कई गांवों में सूखते जल स्रोतों को नया जीवन देने का काम किया है।

शंकर बिष्ट और उनकी टीम ने अब तक करीब 50 पारंपरिक नौलों और धारों का पुनर्जीवन किया है। इसके अलावा जल संरक्षण के लिए 2000 से अधिक चाल-खाल और खंतियों का निर्माण कराया गया है। इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार हुआ और ग्रामीणों को जल संकट से राहत मिली।

उन्होंने पश्चिमी रामगंगा नदी के संरक्षण और अध्ययन के लिए स्रोत से संगम तक विशेष अध्ययन यात्रा भी की। इस यात्रा के माध्यम से लोगों को नदी संरक्षण और जल स्रोतों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। इसके अलावा उन्होंने देवदार संरक्षण अभियान, पौधारोपण कार्यक्रम और जलागम क्षेत्र संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया है।

वर्तमान में भी उनका अभियान लगातार जारी है। पिछले चार महीनों के दौरान बसभीड़ा, महतगांव, हाटझला और झूमाखेत क्षेत्रों में उनकी टीम ने लगभग 50 बड़े चाल-खाल तथा 100 से अधिक खंतियों का निर्माण किया है। इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर भूजल स्तर को बढ़ाना और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करना है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें पहले भी कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें जल दूत सम्मान, चिपको अमृतकाल सम्मान, ग्रीन आइडल अवार्ड, माइथान रत्न सम्मान तथा बेस्ट फायर वॉचर सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। अब गौरा देवी सम्मान उनके कार्यों की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शंकर सिंह बिष्ट ने यह साबित कर दिया है कि यदि समाज और प्रकृति के प्रति समर्पण हो तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े बदलाव संभव हैं। उनके प्रयासों से न केवल जल स्रोतों का संरक्षण हुआ है, बल्कि ग्रामीणों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।

गौरा देवी सम्मान के लिए उनका चयन पूरे चौखुटिया क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान उन हजारों लोगों के प्रयासों का भी सम्मान है जो जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। शंकर सिंह बिष्ट की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति संरक्षण के प्रति प्रेरित करने का काम करेगी।

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Hill Mail

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