देशभर में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल पहुंचने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। मानसून इस बार सामान्य तिथि से करीब तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा है, लेकिन इसके सक्रिय होते ही देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने लगा है। इसका असर आने वाले दिनों में उत्तराखंड में भी देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में मानसून दक्षिण भारत के कई अन्य राज्यों में तेजी से आगे बढ़ेगा। वहीं उत्तर भारत में फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हो रही हैं। उत्तराखंड में भी बीते कुछ दिनों से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई पर्वतीय जिलों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश की घटनाएं सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ उत्तराखंड में भी बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में प्री-मानसून बारिश किसानों और बागवानों के लिए राहत लेकर आई है। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को इससे काफी लाभ मिलने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक उत्तराखंड के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना जताई है। विशेषकर गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है। चारधाम यात्रा मार्गों पर भी यात्रियों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
राज्य के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ समेत कई जिलों में बादलों की आवाजाही बढ़ गई है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। हालांकि मौसम विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन संभावित स्थानों और नदी-नालों के किनारे विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
चारधाम यात्रा के दृष्टिकोण से भी मानसून का आगमन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हर वर्ष मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में प्रशासन यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी बनाए हुए है। यात्रियों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मानसून सक्रिय होने से खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी। पर्वतीय क्षेत्रों में मक्का, मंडुवा, झंगोरा और अन्य पारंपरिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को इसका लाभ मिलेगा। वहीं जल स्रोतों और प्राकृतिक धारों के पुनर्भरण में भी मानसून की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में उत्तराखंड में प्री-मानसून गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। कई स्थानों पर तेज बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही बिजली चमकने और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
केरल में मानसून की दस्तक के साथ ही देशभर में वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। अब उत्तराखंड सहित पूरे उत्तर भारत की निगाहें मानसून की अगली प्रगति पर टिकी हैं। यदि मौसम विभाग के अनुमान सही साबित होते हैं तो आने वाले दिनों में प्रदेशवासियों को गर्मी से बड़ी राहत मिलने के साथ-साथ कृषि, पेयजल और पर्यावरण के क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।








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