स्थानीय हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम में आयोजित ट्रायल उड़ान के दौरान जिलाधिकारी अंशुल सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर. घोड़के मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और निगरानी में ट्रायल प्रक्रिया को संपन्न कराया गया। इस दौरान सुरक्षा से जुड़े आवश्यक मानकों का विशेष ध्यान रखा गया। रवि टम्टा ने जब अपने बनाए फ्लाइंग व्हीकल को उड़ान भराई तो मौके पर मौजूद लोगों में उत्साह देखने को मिला।
इलेक्ट्रिक तकनीक बनी खासियत
“हैपिडा स्काइनेक्स” की सबसे बड़ी विशेषता इसका इलेक्ट्रिक पावर आधारित होना है। इसे पारंपरिक ईंधन के बजाय विद्युत ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में तैयार किया गया है। ऐसे समय में जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों पर जोर दे रही है, रवि टम्टा का यह प्रयास भविष्य की सतत और स्वच्छ परिवहन तकनीक की संभावनाओं की ओर संकेत करता है।
फ्लाइंग व्हीकल की डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। सीमित संसाधनों के बावजूद रवि ने अपने तकनीकी ज्ञान और रचनात्मक सोच के जरिए एक ऐसा उपकरण तैयार किया, जिसने स्थानीय प्रतिभाओं की क्षमता को सामने लाने का काम किया है। उनकी इस उपलब्धि को युवाओं के बीच विज्ञान, तकनीक और नवाचार के प्रति रुचि बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल पर दी बधाई
रवि टम्टा की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे संवाद किया और उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने इस नवाचार को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयोग प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में युवाओं की नई सोच उत्तराखंड में नवाचार की संभावनाओं को मजबूत कर सकती है।
मुख्यमंत्री ने रवि टम्टा को उनके प्रयासों के लिए बधाई देते हुए उनके नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। उन्होंने युवाओं से तकनीकी क्षेत्र में नए प्रयोग करने और अपनी प्रतिभा को देश व प्रदेश के विकास से जोड़ने का आह्वान किया।
प्रशासन ने बताया गौरव का विषय
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने रवि टम्टा की उपलब्धि को अल्मोड़ा जिले के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और उचित मंच मिलने से युवा अपनी रचनात्मक क्षमता को बड़े स्तर पर सामने ला सकते हैं। प्रशासन की ओर से नवाचार और तकनीकी प्रयोगों को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।
रवि टम्टा की सफल ट्रायल उड़ान ने यह संदेश दिया है कि संसाधनों की सीमाएं प्रतिभा और जुनून के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं। “हैपिडा स्काइनेक्स” के जरिए उन्होंने उत्तराखंड के युवाओं में मौजूद तकनीकी क्षमता और नवाचार की संभावनाओं को एक नई पहचान दी है। अब इस फ्लाइंग व्हीकल के आगे के तकनीकी विकास, सुरक्षा परीक्षण और संभावित उपयोग को लेकर लोगों की निगाहें टिकी हैं।


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