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उत्तराखंड में कई सरकारी संस्थानों, पुलिस थानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। सोशल मीडिया पोस्ट और ई-मेल के माध्यम से दी गई धमकियों ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के विभिन्न जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि बम निरोधक दस्तों और डॉग स्क्वॉयड की टीमों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है।
READ MOREनगरासू गुरुद्वारा साहिब में पिछले चार दिनों से चल रहा विवाद मंगलवार को समाप्त हो गया। पंजाब से पहुंचे आठ सदस्यीय शिष्टमंडल और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच हुई वार्ता के बाद पांचों निहंग सिखों को पंजाब रवाना कर दिया गया। हालांकि विवाद समाप्त होने के बावजूद स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी बनी हुई है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान तनाव, पत्थरबाजी और अव्यवस्था के आरोपों के बावजूद किसी भी निहंग के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
READ MOREचमोली जिले के कर्णप्रयाग में 16 जून को सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद दर्ज मामलों, गुरुद्वारा परिसर में जारी तनाव और विभिन्न सिख संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच चमोली से हरिद्वार ट्रांसफर कर दी है। साथ ही घटना के दौरान स्थानीय पुलिस के आचरण और व्यवहार को लेकर लगाए गए आरोपों की उच्चस्तरीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
READ MOREउत्तराखंड की पर्वतीय धरती ने देश को अनेक साहसी और प्रतिभाशाली पर्वतारोही दिए हैं। इन्हीं नामों में अब एक और उपलब्धि जुड़ गई है। रुद्रप्रयाग जिले के चोपता जाखणी गांव के युवा पर्वतारोही आकाश नेगी ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस (5,642 मीटर) को सफलतापूर्वक फतह कर उत्तराखंड और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल पर्वतारोहण जगत में नई पहचान बनाई है, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणा का नया अध्याय लिखा है।
READ MOREकर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद की गूंज शनिवार को रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे तक पहुंच गई। हेमकुंड साहिब यात्रा पर आए कुछ निहंग सिखों द्वारा गुरुद्वारे में हंगामा किए जाने से क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना के बाद पुलिस, प्रशासन और आईटीबीपी को मोर्चा संभालना पड़ा। कई घंटों तक चले घटनाक्रम के कारण स्थानीय लोगों और यात्रियों में दहशत का माहौल बना रहा।
READ MOREविश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की पवित्रता और हिमालयी पर्यावरण की रक्षा के लिए चलाया जा रहा ‘कैरी मी बैक’ अभियान लगातार सफलता की नई कहानी लिख रहा है। जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से संचालित इस अनूठी पहल के तहत अब तक करीब दो टन कचरा केदारनाथ धाम से नीचे गौरीकुंड तक लाया जा चुका है। अभियान को श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का सकारात्मक माहौल बन रहा है।
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उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर केदारनाथ यात्रा की रफ्तार थाम दी है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक जाने वाले पैदल मार्ग पर कई संवेदनशील स्थानों पर भारी बोल्डर और मलबा गिरने के कारण प्रशासन को यात्रियों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है तथा मार्ग को सुरक्षित बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
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बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। दान-चढ़ावे से जुड़े मामलों के बाद अब बद्रीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन के नाम पर प्रति श्रद्धालु ₹1100 शुल्क वसूले जाने का मामला चर्चा में है। आरोप है कि यह शुल्क बिना बोर्ड की औपचारिक स्वीकृति के लागू किया गया, जिससे समिति की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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