Friday , 4 September 2026
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नगरासू गुरुद्वारे में निहंगों का हंगामा, घंटों चला तनाव; पुलिस और आईटीबीपी ने संभाला मोर्चा

जानकारी के अनुसार शनिवार को कुछ निहंग सिख नगरासू गुरुद्वारे पहुंचे और वहां विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे के सेवादार तथा एक बाबा के साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, एक व्यक्ति को कथित तौर पर काफी देर तक बंधक बनाकर रखा गया, जिसे बाद में छोड़ दिया गया। घटना के बाद गुरुद्वारे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र होने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ने के बाद कुछ निहंग गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए। बताया जा रहा है कि उनके हाथों में पत्थर थे और उन्होंने नीचे की ओर कुछ पत्थर भी फेंके। इससे आसपास मौजूद लोगों में भय का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि निहंगों ने गुरुद्वारे में लगे कुछ सूचना पट्ट भी हटा दिए। घटना के बाद गुरुद्वारे के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

बताया जा रहा है कि निहंगों की नाराजगी कर्णप्रयाग में कुछ दिन पहले हुई मारपीट की घटना को लेकर थी। उनका आरोप है कि उस मामले में स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन ने उचित आपत्ति दर्ज नहीं कराई और न ही पीड़ित पक्ष का समर्थन किया। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने नगरासू गुरुद्वारे में पहुंचकर विरोध जताया। हालांकि प्रशासन मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों को भी तैनात किया गया। सुरक्षा बलों ने पूरे गुरुद्वारे को चारों ओर से घेर लिया और स्थिति को नियंत्रण में लेने के प्रयास शुरू किए।

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुरेश बलूनी ने बताया कि गुरुद्वारे के भीतर कुल आठ लोग मौजूद थे, जिनमें सात निहंग शामिल थे। उन्होंने खुद को गुरुद्वारे के अंदर बंद कर लिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार उनके पास पत्थरों के अलावा भाले जैसे पारंपरिक हथियार भी मौजूद थे। प्रशासन लगातार उनसे बातचीत कर शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास करता रहा।

गढ़वाल रेंज के आईजी राजीव स्वरूप ने बताया कि नगरासू गुरुद्वारे में निहंगों द्वारा हंगामा किए जाने की सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को तैनात किया गया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर संबंधित लोगों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है।

उधर, कर्णप्रयाग में हुई घटना के बाद पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जबकि कुछ सिख संगठनों ने प्रशासन को अल्टीमेटम भी दिया है। बढ़ती संवेदनशीलता और चारधाम यात्रा के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कर्णप्रयाग क्षेत्र में धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी है।

उपजिलाधिकारी अलकेश नौडियाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह निषेधाज्ञा 20 जून की शाम 7 बजे से लागू होकर 27 जून तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अफवाहों पर रोक लगाने और चारधाम यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

फिलहाल नगरासू और कर्णप्रयाग दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना पर विश्वास न करने की अपील की है। मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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Hill Mail

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