कर्णप्रयाग विवाद की जांच हरिद्वार ट्रांसफर, स्थानीय पुलिस की भूमिका की होगी उच्चस्तरीय जांच

कर्णप्रयाग विवाद की जांच हरिद्वार ट्रांसफर, स्थानीय पुलिस की भूमिका की होगी उच्चस्तरीय जांच

चमोली जिले के कर्णप्रयाग में 16 जून को सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद दर्ज मामलों, गुरुद्वारा परिसर में जारी तनाव और विभिन्न सिख संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच चमोली से हरिद्वार ट्रांसफर कर दी है। साथ ही घटना के दौरान स्थानीय पुलिस के आचरण और व्यवहार को लेकर लगाए गए आरोपों की उच्चस्तरीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, घटना में घायल हुए सिख श्रद्धालु के पिता सोमराज निवासी सोहाना, मोहाली (पंजाब) की शिकायत पर कर्णप्रयाग थाने में अज्ञात स्थानीय लोगों के खिलाफ क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इससे पहले स्थानीय पक्ष की ओर से भी मामला दर्ज कराया गया था। अब दोनों मामलों की जांच हरिद्वार पुलिस करेगी, जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के पर्यवेक्षण में आगे बढ़ाई जाएगी।

बताया गया है कि सिख पक्ष के प्रतिनिधियों ने पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर घटना की निष्पक्ष जांच और स्थानीय पुलिस की भूमिका की समीक्षा की मांग की थी। इसके बाद आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप की संस्तुति पर जांच को जिले से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। पुलिस मुख्यालय ने स्थानीय पुलिस के आचरण संबंधी आरोपों की जांच की जिम्मेदारी डीआईजी यशवंत सिंह को सौंपी है।

यह पूरा विवाद 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में पार्किंग को लेकर शुरू हुआ था। जानकारी के अनुसार, हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे कुछ निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी के बाद झड़प हो गई थी। आरोप है कि विवाद के दौरान तलवारें भी चलीं, जिसमें कुछ स्थानीय लोग घायल हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और मामला धीरे-धीरे धार्मिक एवं सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़ गया।

इसी घटनाक्रम के बाद रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में भी तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। पिछले तीन दिनों से कुछ निहंग गुरुद्वारे की छत पर डटे हुए हैं और अपनी मांगों को लेकर विरोध जता रहे हैं। प्रशासन लगातार उन्हें शांतिपूर्वक नीचे लाने और स्थिति को सामान्य करने के प्रयास कर रहा है।

सोमवार को पुलिस ने एक निहंग को भोजन लेकर गुरुद्वारे की ओर जाते समय रोक लिया, जबकि चार अन्य निहंग अब भी गुरुद्वारे की छत पर मौजूद बताए जा रहे हैं। पूरे परिसर और आसपास के क्षेत्र में पुलिस तथा आईटीबीपी के जवान तैनात हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए गुरुद्वारे के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर परिसर के विभिन्न हिस्सों में चौबीस घंटे निगरानी रखी जा रही है।

मामले के समाधान के लिए अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, पुलिस उपाधीक्षक विकास पुंडरी, एसडीएम रुद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी और एसडीएम ऊखीमठ अनिल रावत लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की टीम दिन-रात स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

घटना का असर स्थानीय व्यापार और पर्यटन गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। नगरासू बाजार में पिछले तीन दिनों से सिख श्रद्धालुओं की आवाजाही कम हो गई है। सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुद्वारे में रुकते और लंगर ग्रहण करते हैं, लेकिन वर्तमान तनावपूर्ण माहौल के कारण अधिकांश यात्री बिना रुके आगे बढ़ रहे हैं। इससे स्थानीय होटल, लॉज और दुकानदारों के कारोबार पर भी असर पड़ा है।

इस बीच जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर लगातार मामले की निगरानी कर रहे हैं। दोनों अधिकारी बीते दो दिनों से घोलतीर पुलिस चौकी से घटनाक्रम की समीक्षा कर रहे हैं और हर गतिविधि का अपडेट ले रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

उधर, शासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस मुख्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सचिव गृह शैलेश बगोली ने कहा कि घटना की शुरुआत से लेकर अब तक की पूरी परिस्थितियों की रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले को सांप्रदायिक रंग देने या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन और पुलिस का कहना है कि निष्पक्ष जांच, कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। अब पूरे मामले की जांच हरिद्वार पुलिस द्वारा किए जाने और उच्चस्तरीय जांच शुरू होने के बाद सभी पक्षों की निगाहें जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं।

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