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उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। वहीं ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के भी आसार हैं। मौसम में इस बदलाव से तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।
READ MOREचारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या अब यात्रा मार्गों पर भारी दबाव बनाती दिखाई दे रही है। रुद्रप्रयाग से लेकर सोनप्रयाग तक प्रमुख कस्बों और बाजारों में घंटों लंबा जाम लगने से यात्री बेहाल हैं। चिलचिलाती गर्मी के बीच सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों और व्यापारियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
READ MOREचारधाम यात्रा के चरम पर पहुंचते ही उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में पेट्रोल-डीजल संकट और ट्रैफिक जाम ने तीर्थ यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोमवार को ज्योतिर्मठ में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब नगर के एकमात्र पेट्रोल पंप पर तेल खत्म हो गया और बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ा। पेट्रोल न मिलने से नाराज यात्रियों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में प्रशासन की ओर से सीमित मात्रा में तेल उपलब्ध कराने के बाद स्थिति सामान्य हो सकी।
READ MOREबेमौसम बर्फबारी से पिघल रहे हिमालय के “वॉटर बैंक”, वैज्ञानिकों ने जताई बड़ी चिंता हिमालय की बर्फ अब अपने तय मौसम में नहीं गिर रही। कभी दिसंबर-जनवरी में सफेद चादर ओढ़ने वाले पहाड़ अब मार्च और अप्रैल में बर्फबारी का सामना कर रहे हैं। यह बदलाव केवल मौसम का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि हिमालय के भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के ताजा शोध ने खुलासा किया है कि हिमालय में बर्फबारी का पूरा पैटर्न तेजी से बदल रहा है, जिसका सीधा असर ग्लेशियरों, जलस्रोतों, खेती, पर्यटन और लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है।
READ MOREउत्तरकाशी के हिमालयी क्षेत्रों में इन दिनों चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या अब पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में पहुंच रहे हजारों छोटे-बड़े वाहनों से निकलने वाला धुआं और गैस उत्सर्जन न केवल वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसका असर हिमालयी क्षेत्रों की बर्फबारी, ग्लेशियरों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
READ MOREपंच केदारों में द्वितीय केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बृहस्पतिवार को वैदिक मंत्रोच्चारण, धार्मिक अनुष्ठानों और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयकारों के बीच श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाटोद्घाटन के इस पावन अवसर का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे। करीब 1135 श्रद्धालुओं ने भगवान मद्महेश्वर के प्रथम दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
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उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर केदारनाथ यात्रा की रफ्तार थाम दी है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक जाने वाले पैदल मार्ग पर कई संवेदनशील स्थानों पर भारी बोल्डर और मलबा गिरने के कारण प्रशासन को यात्रियों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है तथा मार्ग को सुरक्षित बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
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बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। दान-चढ़ावे से जुड़े मामलों के बाद अब बद्रीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन के नाम पर प्रति श्रद्धालु ₹1100 शुल्क वसूले जाने का मामला चर्चा में है। आरोप है कि यह शुल्क बिना बोर्ड की औपचारिक स्वीकृति के लागू किया गया, जिससे समिति की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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