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मद्महेश्वर मंदिर की पवित्र उत्सव डोली मंगलवार को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से अपने मूल धाम के लिए भव्य धार्मिक परंपराओं और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ रवाना हुई। पंचकेदारों में द्वितीय केदार के रूप में पूजित भगवान मद्महेश्वर की डोली यात्रा के शुभारंभ पर पूरा ऊखीमठ क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय बाबा मद्महेश्वर” के जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धा, आस्था और भक्ति से ओतप्रोत इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय ग्रामीण और तीर्थ पुरोहित उपस्थित रहे।
READ MOREमध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल का असर अब उत्तराखंड की रसोई तक पहुंचने लगा है। राज्य के मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ी जिलों तक सब्जियों की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। परिवहन लागत बढ़ने और बाहरी राज्यों से आने वाली सब्जियों की आवक प्रभावित होने से टमाटर, प्याज, हरी मिर्च और लहसुन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब और रसोई बजट पर पड़ रहा है।
READ MOREउत्तराखंड की लोक आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का सबसे विराट प्रतीक मानी जाने वाली मां नंदा देवी की पवित्र यात्रा को लेकर लंबे समय से चल रहा संशय अब लगभग समाप्त हो गया है। कुरूड़ मंदिर समिति ने आधिकारिक रूप से वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली “नंदा देवी बड़ी जात यात्रा” की घोषणा करते हुए इसका पूरा 21 दिवसीय यात्रा कार्यक्रम जारी कर दिया है। यह ऐतिहासिक और आस्था से जुड़ी यात्रा आगामी 5 सितंबर 2026 से सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर से आरंभ होगी। मां नंदा देवी की कैलाश प्रस्थान यात्रा के रूप में आयोजित होने वाली यह यात्रा उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।
READ MOREचारधाम यात्रा में इस वर्ष श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या जहां उत्तराखंड की धार्मिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर हिमालयी पारिस्थितिकी पर बढ़ते प्लास्टिक कचरे ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। यात्रा मार्गों, नदी तटों और धामों के आसपास फैल रहा सिंगल यूज प्लास्टिक अब हिमालय की संवेदनशील प्रकृति के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में ग्लेशियरों के पिघलने, भूस्खलन और जल प्रदूषण जैसी समस्याएं और भयावह हो सकती हैं।
READ MOREउत्तराखंड में चल रही पवित्र चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) का इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सेंटर (आईसीसीसीसी) अहम भूमिका निभा रहा है। खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी यह आधुनिक नियंत्रण केंद्र हेली सेवाओं की हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर बनाए हुए है, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा अनुभव मिल रहा है।
READ MOREउत्तराखंड के इतिहास में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। जिस सपने को पहाड़ों ने 141 वर्षों तक अपनी आंखों में संजोकर रखा, वह अब धीरे-धीरे हकीकत बनने लगा है। सामरिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आगामी 20 मई से इस परियोजना के तहत पहली बार ऋषिकेश से आगे पहाड़ों में रेलवे ट्रैक बिछाने का कार्य शुरू होने जा रहा है।
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उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर केदारनाथ यात्रा की रफ्तार थाम दी है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक जाने वाले पैदल मार्ग पर कई संवेदनशील स्थानों पर भारी बोल्डर और मलबा गिरने के कारण प्रशासन को यात्रियों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है तथा मार्ग को सुरक्षित बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
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बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। दान-चढ़ावे से जुड़े मामलों के बाद अब बद्रीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन के नाम पर प्रति श्रद्धालु ₹1100 शुल्क वसूले जाने का मामला चर्चा में है। आरोप है कि यह शुल्क बिना बोर्ड की औपचारिक स्वीकृति के लागू किया गया, जिससे समिति की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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