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उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी गांवों में आज भी विकास की तस्वीर अधूरी दिखाई देती है। एक ओर सरकार गांव-गांव सड़क पहुंचाने और सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर कई गांव ऐसे हैं जहां आज भी बीमारों और गर्भवती महिलाओं को डंडी-कंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। चमोली जिले के देवाल ब्लॉक का बलाण गांव और उत्तरकाशी के नौगांव क्षेत्र का दोणी गांव इसी दर्दनाक हकीकत की कहानी बयां कर रहे हैं।
READ MOREरुद्रप्रयाग की ऊंची पहाड़ियों और कठिन मौसम के बीच इन दिनों एक बेटी अपने साहस, आत्मविश्वास और कौशल से नई पहचान बना रही है। केदारनाथ धाम के लिए हेलीकॉप्टर सेवा में तैनात पायलट अनुपम चौधरी आज न केवल यात्रियों को सुरक्षित यात्रा करा रही हैं, बल्कि हजारों युवतियों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन गई हैं।
READ MOREउत्तराखंड में आगामी मानसून सीजन को देखते हुए शासन-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानसून आने से पहले प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए, ताकि आम जनता को बारिश के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय रहते तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।
READ MOREउत्तराखंड में पर्यटन और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार बड़े स्तर पर योजनाएं तैयार कर रही है। इसी कड़ी में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में रोपवे परियोजनाओं और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार का लक्ष्य है कि इन योजनाओं के माध्यम से पर्यटन को गति देने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की जाए।
READ MOREउत्तराखंड की पवित्र पंच केदार श्रृंखला में चतुर्थ केदार के रूप में प्रसिद्ध रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 18 मई 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। हिमालय की गोद में बसे इस दिव्य धाम के कपाट खुलने का क्षण हर वर्ष भक्तों के लिए अत्यंत खास और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है। इस वर्ष भी कपाट खुलने से पहले परंपराओं और विधि-विधान के साथ डोली यात्रा का आयोजन किया जाएगा, जो आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।
READ MOREउत्तराखंड के पवित्र धाम बद्रीनाथ मंदिर को हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह चारधाम यात्रा का एक प्रमुख केंद्र है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस मंदिर की सबसे विशेष परंपराओं में से एक है इसके मुख्य पुजारी, जिन्हें “रावल” कहा जाता है।
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उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर केदारनाथ यात्रा की रफ्तार थाम दी है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक जाने वाले पैदल मार्ग पर कई संवेदनशील स्थानों पर भारी बोल्डर और मलबा गिरने के कारण प्रशासन को यात्रियों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है तथा मार्ग को सुरक्षित बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
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बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। दान-चढ़ावे से जुड़े मामलों के बाद अब बद्रीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन के नाम पर प्रति श्रद्धालु ₹1100 शुल्क वसूले जाने का मामला चर्चा में है। आरोप है कि यह शुल्क बिना बोर्ड की औपचारिक स्वीकृति के लागू किया गया, जिससे समिति की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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