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हिमालय की गोद में गूंजेगा मां नंदा का जयघोष: 5 सितंबर 2026 से शुरू होगी 21 दिवसीय ‘नंदा देवी बड़ी जात यात्रा’

लोक परंपराओं के अनुसार मां नंदा देवी स्वयं अपने प्रमुख पश्वा के माध्यम से यात्रा पर जाने की इच्छा प्रकट करती हैं। इसी दैवीय संकेत के आधार पर यात्रा की शुभ तिथियां तय की जाती हैं। वसंत पंचमी के अवसर पर कुरूड़ मंदिर परिसर में गौड़ ब्राह्मणों ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद यात्रा के कार्यक्रम की घोषणा की। इसके साथ ही क्षेत्रभर में यात्रा की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। गांव-गांव में उत्साह का माहौल है और श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनने के लिए अभी से तैयारियों में जुट गए हैं।

दरअसल, इससे पहले श्री नंदा देवी राजजात समिति ने वर्ष 2027 में राजजात यात्रा आयोजित करने की घोषणा की थी। वहीं दूसरी ओर कुरूड़ मंदिर समिति ने महापंचायत आयोजित कर यह स्पष्ट कर दिया कि यात्रा वर्ष 2026 में ही निकाली जाएगी। इसी मतभेद के चलते श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। अब इस विवाद को समाप्त करते हुए वर्ष 2026 की यात्रा को “नंदा देवी बड़ी जात यात्रा” नाम दिया गया है, जबकि पारंपरिक “नंदा देवी राजजात यात्रा” वर्ष 2027 में आयोजित होगी।

कुरूड़ मंदिर समिति के नेतृत्व में होने वाली इस बड़ी जात यात्रा में बदाण, दशोली, लाता और बंड क्षेत्र के पारंपरिक हक-हकूकधारी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। यात्रा के दौरान विभिन्न गांवों में मां नंदा देवी की डोलियों का भव्य स्वागत किया जाएगा। लोकगीतों, ढोल-दमाऊं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के बीच पूरी यात्रा एक जीवंत सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लेती है।

उधर नौटी गांव स्थित मां नंदा देवी मंदिर में राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर ने घोषणा की है कि आधिकारिक “नंदा देवी राजजात यात्रा” का दिनपत्र वसंत पंचमी 2027 को जारी किया जाएगा। प्रशासन और सरकार ने यात्रा के सफल संचालन के लिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय मांगा है, ताकि मार्गों की मरम्मत, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा सके।

नंदा देवी राजजात यात्रा को विश्व की सबसे लंबी धार्मिक पैदल यात्राओं में गिना जाता है। लगभग 280 किलोमीटर लंबी यह कठिन यात्रा 20 से 21 दिनों तक हिमालय की दुर्गम वादियों, बुग्यालों और बर्फीले रास्तों से होकर गुजरती है। इसे “हिमालय का कुंभ” भी कहा जाता है। यात्रा की सबसे विशेष पहचान चौसिंगा खाडू होता है, जिसे मां नंदा देवी का जीवंत प्रतीक माना जाता है। चार सींगों वाला यह दुर्लभ मेढ़ा पूरी यात्रा का नेतृत्व करता है और श्रद्धालु इसे देवी का दिव्य स्वरूप मानकर पूजा करते हैं।

पारंपरिक रूप से यह यात्रा चमोली जिले के नौटी गांव से आरंभ होकर होमकुंड तक पहुंचती है। समुद्र तल से हजारों फीट ऊंचाई पर स्थित होमकुंड हिमालय की गोद में बसे सबसे कठिन और पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यात्रा मार्ग में पड़ने वाले रूपकुंड, बेदिनी बुग्याल, आली बुग्याल और शैलसमुद्र जैसे प्राकृतिक स्थल श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करते हैं।

नंदा देवी बड़ी जात यात्रा 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सामूहिक आस्था का जीवंत उत्सव होगी। यह यात्रा जहां एक ओर श्रद्धालुओं को देवी के प्रति समर्पण का अवसर देती है, वहीं दूसरी ओर हिमालयी संस्कृति और प्रकृति से जुड़ने का भी दुर्लभ अनुभव कराती है। अब जैसे-जैसे 5 सितंबर 2026 की तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे पूरे उत्तराखंड में मां नंदा देवी के जयघोष के साथ भक्ति और उत्साह का माहौल और अधिक गहराता जा रहा है।

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