देहरादून के औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई में शुक्रवार को श्रमिकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। वेतन वृद्धि, ठेका प्रथा और श्रम कानूनों के पालन की मांग को लेकर करीब तीन हजार श्रमिकों ने विभिन्न फैक्ट्रियों के बाहर प्रदर्शन किया। हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब प्रदर्शनकारी हाईवे पर उतर आए और यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने पहले समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात न बनने पर हल्का बल प्रयोग करते हुए श्रमिकों को हाईवे से हटाया गया। इस दौरान तीन श्रमिकों को मामूली चोटें भी आईं।
सेलाकुई की डिक्सन, विंडलास फार्मा, इडोरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स और लाइटेनियम टेक्नोलॉजी जैसी कंपनियों के कर्मचारी सुबह से ही धरने पर बैठ गए थे। श्रमिकों का आरोप था कि उन्हें श्रम कानूनों के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा है और अधिकांश कर्मचारियों को ठेका प्रथा के तहत रखकर उनका शोषण किया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों का कहना था कि उनसे 12-12 घंटे काम लिया जाता है, लेकिन इसके बदले उचित वेतन, पीएफ, मेडिकल और अन्य सुविधाएं नहीं दी जातीं।
दोपहर करीब एक बजे प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में हाईवे पर पहुंच गए और सड़क जाम कर दी। हाईवे जाम होने से यातायात प्रभावित होने लगा, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। पुलिस अधिकारियों ने श्रमिकों से कई बार हाईवे खाली करने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने जमीन पर लाठियां फटकारते हुए हल्का बल प्रयोग किया। पुलिस कार्रवाई के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और श्रमिक हाईवे से हट गए। दोपहर बाद करीब तीन बजे तक धरना-प्रदर्शन समाप्त हो गया।
इधर, हरिद्वार के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में भी वेतन वृद्धि को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल जारी रही। कई कंपनियों के कर्मचारी दिनभर फैक्ट्री गेट पर डटे रहे। हालांकि शाम तक कई कंपनियों में प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच समझौता होने की खबर सामने आई।
श्रमिकों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार भी सख्त नजर आई। सचिवालय में आयोजित बैठक में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आरके सुधांशु ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी उद्योगों में श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को न्यूनतम वेतन समेत सभी सुविधाएं पारदर्शी तरीके से मिलनी चाहिए। साथ ही उद्योगों की व्यापक स्क्रीनिंग कर यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि श्रमिकों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।
उधर, श्रम विभाग ने भी अफवाहों और भ्रम फैलाने वालों पर नजर रखनी शुरू कर दी है। श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने कहा कि श्रमिकों को भड़काकर माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 781 रुपये प्रतिदिन वेतन लागू होने जैसी खबरें भ्रामक हैं और राज्य के उद्योगों पर ऐसा कोई नियम लागू नहीं हुआ है।
श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए हल्द्वानी में 24 घंटे कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। श्रमिक किसी भी शिकायत के लिए विभागीय अधिकारियों या कंट्रोल रूम से सीधे संपर्क कर सकते हैं। सरकार और प्रशासन अब इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिति सामान्य बनी रहे।







