उत्तराखंड पुलिस द्वारा राज्यभर में चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन प्रहार’ ने अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश दिया है। अभियान के तहत अब तक 1400 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की गई है, जबकि हजारों वाहनों को सीज कर कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अभियान की प्रगति का आकलन किया गया।
बैठक में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ स्वयं मौजूद रहे, जबकि सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। समीक्षा के बाद डीजीपी ने बताया कि ऑपरेशन प्रहार के तहत अपराध नियंत्रण, अवैध हथियारों की बरामदगी, गैंगस्टर गतिविधियों पर रोक और संदिग्ध तत्वों के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
अभियान के दौरान गैंगस्टर एक्ट के तहत 40 से अधिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि गुंडा एक्ट के तहत 130 से ज्यादा लोगों को चिन्हित कर कानूनी शिकंजे में लिया गया। इसके अलावा राज्यभर से 66 अवैध हथियार बरामद किए गए, जिनमें पिस्टल, तमंचे और कारतूस शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल गंभीर आपराधिक घटनाओं में किया जा सकता था।
ऑपरेशन प्रहार के दौरान ऊधमसिंहनगर पुलिस को बड़ी सफलता उस समय मिली जब हरेंद्र सिंह उर्फ हनी और निखिल वर्मा को अवैध असलाह और कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया गया। जांच में इनके तार आतंकी संगठन ‘अल बदर’ से जुड़े पाए गए। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं और दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है।
इसी क्रम में एसटीएफ ने विक्रांत कश्यप नामक युवक को गिरफ्तार किया, जो पाकिस्तानी आतंकी संगठन ‘अल बरक ब्रिगेड’ के संपर्क में बताया जा रहा है। उसके पास से अवैध पिस्टल और कारतूस बरामद किए गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरफ्तारी राज्य की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे सीमापार आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आने की संभावना है।
डीजीपी दीपम सेठ ने बताया कि अभियान के दौरान 900 से अधिक लोगों को विभिन्न मामलों में गिरफ्तार किया गया, जबकि यातायात नियमों और संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर 2000 से अधिक वाहनों को सीज किया गया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन प्रहार केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करना और जनता में सुरक्षा का भरोसा कायम करना भी है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार आने वाले दिनों में भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा। संवेदनशील जिलों, सीमावर्ती क्षेत्रों और शहरी इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अपराधियों, नशा तस्करों, गैंगस्टरों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उत्तराखंड पुलिस की इस व्यापक कार्रवाई को राज्य में अपराध नियंत्रण की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है। ऑपरेशन प्रहार ने साफ संकेत दिया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं छोड़ी जाएगी।







