देवभूमि की सांस्कृतिक आत्मा हैं जागर परंपराएं, विरासत बचाने का संदेश दे गए योगी आदित्यनाथ

देवभूमि की सांस्कृतिक आत्मा हैं जागर परंपराएं, विरासत बचाने का संदेश दे गए योगी आदित्यनाथ

उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर गहरा जुड़ाव दिखाया। अपने पैतृक गांव पंचूर पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड की जागर परंपरा और लोक संस्कृति को देश की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि देवभूमि की पहचान केवल उसके मंदिरों और प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि उसकी जीवंत लोक परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना से भी है।

यमकेश्वर क्षेत्र में ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड सदियों से आध्यात्मिक ऊर्जा और लोक आस्था की भूमि रहा है। यहां की जागर परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोक जीवन, संस्कृति, इतिहास और सामाजिक चेतना की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के आह्वान के लिए लगाए जाने वाले जागर लोगों की आस्था का केंद्र हैं और यह परंपरा कई सौ वर्षों से समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जागर गाथाओं में केवल गीत-संगीत ही नहीं होता, बल्कि इनमें लोक इतिहास, संघर्ष, परंपराएं और आध्यात्मिक चेतना भी समाहित होती है। इन गाथाओं के माध्यम से लोक देवताओं, पूर्वजों और समाज की स्मृतियों को जीवित रखा जाता है। उन्होंने कहा कि जब नई पीढ़ी इन परंपराओं से जुड़ती है तो उसे अपनी संस्कृति और विरासत की वास्तविक पहचान मिलती है।

योगी आदित्यनाथ ने आधुनिकता के दौर में सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि समाज अपनी जड़ों और परंपराओं से कट जाएगा तो उसकी पहचान भी कमजोर हो जाएगी। उत्तराखंड की लोक परंपराएं केवल पहाड़ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरे देश को सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देती हैं।

अपने गांव पहुंचने के दौरान मुख्यमंत्री ने रास्ते में दिखाई दिए बंजर और खाली पड़े खेतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में खेती योग्य जमीन का इस तरह खाली रहना चिंताजनक है। गांवों की असली पहचान खेती, हरियाली और पारंपरिक जीवनशैली से होती है। उन्होंने ग्रामीणों से पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देने और खाली पड़े खेतों को फिर से आबाद करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की खेती केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा है। यदि खेत खाली होंगे तो गांवों की रौनक और सामाजिक संरचना दोनों प्रभावित होंगी। मुख्यमंत्री ने युवाओं से गांव और खेती से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि पहाड़ की पहचान उसकी संस्कृति, भाषा, लोक परंपराओं और कृषि से बनी रहती है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोक परंपराएं समाज को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। जागर गाथाएं लोगों में आस्था, सकारात्मक सोच और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा, लोक कला और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उत्तराखंड की गौरवशाली विरासत से परिचित हो सकें।

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