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डॉ. मनमोहन सिंह चौहान बने जीबी पंत कृषि विवि के कुलपति

राज्यपाल ले जनरल गुरमीत सिंह ने डॉ. मनमोहन सिंह चौहान, निदेशक नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल को गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्व विद्यालय, पंतनगर के कुलपति पद पर नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल पद ग्रहण करने की तिथि से 3 वर्ष तक होगा। यह आदेश 15 अगस्त को जारी किया गया।

 

भारत के शीर्ष पशु विज्ञानियों का जब भी जिक्र होता है तो उसमें डॉ मनमोहन सिंह चौहान का नाम जरूर लिखा जायेगा। इससे पहले वह डॉ. मनमोहन सिंह चौहान राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल में निदेशक (प्रधान वैज्ञानिक पशु जैव प्रौद्योगिकी) के पद पर कार्यरत थे।

डॉ मनमोहन सिंह चौहान को गाय, भैंस, याक एवं बकरी से जुड़े अनुसंधान के क्षेत्र में काफी ख्याति हासिल है। उन्होंने अनुसंधान के 32 वर्षों में पशुधन कार्यकुशलता के लिए अनेक क्षमतावान जनन जैव प्रौद्योगिकी विकसित की हैं।

एनएसए अजीत डोभाल ने डा. मनमोहन सिंह चौहान को उनके उत्कृष्ठ काम के लिए हिल-रत्न अवार्ड से भी सम्मानित किया है।

डॉ. चौहान ने गाय, भैंस, बकरी एवं याक जानवरों में टेस्ट ट्यूब बेबी की तकनीकी के (इनविट्रो भ्रूण) महत्वपूर्ण एवं आसान तरीके विकसित किए हैं। डॉ. चौहान के नाम विश्व में सबसे पहले भैंस की कटिया का क्लोन ’गरिमा 2’ तैयार करने का रिकॉर्ड है।

उन्होंने एम्ब्रयोनिक स्टेम सेल से यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने भैंस के कान के टुकड़े से 14 भैंस तैयार की। उनके नाम भारत में पहला ओपीयू-आईवीएफ साहीवाल बछड़ा तैयार करने का भी रिकॉर्ड है।

डॉ. चौहान को भारतीय कृषि के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त शोध पुरस्कार जैसे रफी अहमद किदवई अवार्ड, डीबीटी ओवरसीज लांग टर्म एसोसिएटशिप अवार्ड, आईसीएआर टीम अवार्ड, डॉ. लभतेसर आईएसएसआरएफ अवार्ड, सर्टिफिकेट आफ मेरिट अवार्ड फार एक्सेम्पलरी रिसर्च, वर्जीनिया पॉलीटेक्निक इंस्टीटयूट एवं स्टेट यूनीर्विसिटी, अमेरिका समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।

डॉ. चौहान ने अब तक 125 शोध पत्र, 2 पुस्तक, 90 वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रकाशन प्रकाशित किए है। उत्तराखंड के मूल निवासी होने के कारण डॉ. चौहान का यहां के गरीब किसानों के उत्थान के लिए विशेष ध्यान रहता है। उनके निर्देशन में उत्तराखंड में बकरी उत्थान के लिए कई कैंप लगाए जा चुके हैं।

डॉ. मनमोहन सिंह चौहान का जन्म 5 जनवरी, 1960 को पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर के जामल गांव में हुआ। जयहरीखाल से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और बीएससी करने के बाद डॉ. चौहान ने 1981 में श्रीनगर, गढ़वाल से एमएससी की। पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी जाकर पीएचडी का थीसिस लिखा। मनमोहन सिंह चौहान को 1986 में पीएचडी की डिग्री मिली।

इसके बाद वह राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल में वैज्ञानिक के पद पर रहे। परिवार में माता पिता, पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है।

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Hill Mail

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