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देश की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सभी राज्यों को एक साझा रणनीति तहत काम करना होगा – केन्द्रीय गृह मंत्री

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज हरियाणा के सूरजकुंड में दो दिवसीय चिंतन शिविर को संबोधित किया। दो दिवसीय चिंतन शिविर में राज्यों के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और संघशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और प्रशासक भाग ले रहे हैं।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से आयोजित ये चिंतन शिविर देश के सामने मौजूद सभी चुनौतियों, जैसे, साइबर अपराध, नारकोटिक्स का प्रसार और सीमापार आतंकवाद आदि का मिलकर सामना करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि आज अपराधों का स्वरूप बदल रहा है और ये सीमारहित हो रहे हैं, इसीलिए सभी राज्यों को मिलकर एक साझा रणनीति बनाकर इसके खिलाफ लड़ना होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरियाणा के सूरजकुंड में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों के गृह मंत्रियों के चिंतन शिविर में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य कठिन एवं दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों से युक्त राज्य है, जिसकी अन्तर्राष्ट्रीय सीमाएं उत्तर में तिब्बत चीन एवं पूर्व में नेपाल के साथ जुड़ी हुई हैं। इस प्रकार राष्ट्रीय सुरक्षा में राज्य का सामरिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है।

उन्होंने कहा कि हमारे राज्य द्वारा कानून व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालन हेतु संविधान के अनुच्छेद 44 जो कि समान नागरिक संहिता लागू किये जाने से सम्बन्धित है, की भावना का सम्मान करते हुये राज्य में समान नागरिक संहिता लागू किये जाने हेतु गठित विशेषज्ञ समिति वर्तमान में एक विस्तृत रिपोर्ट बनाने का कार्य कर रही है। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के उपरान्त राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होने से राज्य में सभी धर्मों व सम्प्रदायों के निवासी लाभान्वित होंगे। तथा सभी धर्मों को मानने वाली महिलाओं की स्थिति में गुणात्मक सुधार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के समक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों से राज्य के नागरिकों द्वारा किया जाने वाला पलायन अत्यन्त चुनौतीपूर्ण रहा है, जिसे रोकने हेतु विगत 5 व 6 वर्षों में प्रभावित क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद पिथौरागढ़, उत्तरकाशी एवं चमोली में 13 सड़कों का लगभग 600 किमी निर्माण कार्य गतिमान है, जिसमें से 4 सड़कों का लगभग 150 किमी निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जनपद पिथौरागढ़ में नेपाल सीमा से लगे छारछुम नामक स्थान पर मैंने हाल ही में एक पुल का शिलान्यास किया, जिसके पूर्ण होने पर सामारिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीमान्त क्षेत्र के नागरिकों का आवागमन सहज एवं सुगम हो सकेगा। हाल ही में बद्रीनाथ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में गांवों की महत्ता को रेखांकित करते हुये सीमान्त गांव माणा को देश के अंतिम गांव की जगह प्रथम गांव की संज्ञा दी है। जिसके लिये प्रधानमंत्री जी ने भी अपनी संस्तुति दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमान्त गांव देश के प्रथम प्रहरी है और इनका समुचित विकास करना हमारा कर्तव्य है। राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा बनाये रखने हेतु राज्य सरकार द्वारा इन क्षेत्रों से हो रहे स्थानीय निवासियों के पलायन को रोकने और उन्हें यहीं पर चिकित्सा स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा एवं रोजगार इत्यादि की सुविधा प्रदान किये जाने के प्रयास शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर किये जा रहें है।

प्रधानमंत्री द्वारा जगायी गयी अलख के क्रम में राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं को एनसीसी से जोड़े जाने का अभियान गतिमान है। इसी प्रकार सीमाओं की सुरक्षा के दृष्टिगत राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों के 10 हजार सेवानिवृत्त सैनिकों, अर्द्धसैनिकों एवं युवाओं को सीमा सुरक्षा के सम्बन्ध में प्रशिक्षित कर उन्हें राज्य के सीमान्त जिलों में तैनात किये जाने हेतु हम ‘हिम प्रहरी’ योजना पर काम कर रहे है, जिसमें 5 करोड़ रूपये प्रतिमाह का सहयोग केन्द्र सरकार से अपेक्षित है।

उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा की दृष्टि से राज्य सरकार द्वारा राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन सम्बन्धी गतिविधियों में वृद्धि हेतु इनर लाईन प्रतिबन्धों पर छूट प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में हमने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया है।

इसी प्रकार राज्य में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों तथा चारधाम यात्रा एवं कांवड यात्रा में आने वाले करोड़ो तीर्थ यात्रियों की सुरक्षित यात्रा का दायित्व भी राज्य सरकार पर ही है, जिसका निवर्हन हम पूरी क्षमता के साथ कर रहे हैं। जिसके फलस्वरूप इस वर्ष हम 4 करोड़ शिवभक्तों को कांवड़ यात्रा व अभी तक करीब 45 लाख श्रद्धालुओं को सफलतापूर्वक चारधार यात्रा कराने में सफल हुये हैं। इन कार्यों हेतु आवश्यक सहयोग की भी हमें केन्द्र सरकार से निरन्तर आवश्यकता रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य कठिन एवं दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों से युक्त पर्वतीय राज्य है, जिसमें अतिवृष्टि, बाढ़, भू-स्खलन एवं वाहन दुर्घटनाओं का निरन्तर सामना करना पड़ता है। वर्ष 2013 में श्री केदारनाथ आपदा के उपरान्त राज्य में एसडीआरएफ का गठन किया गया, जिसके द्वारा राज्य में आपदा से पीडित व्यक्तियों के साथ-साथ वन विभाग के साथ समन्वय एवं सहयोग स्थापित करते हुये वनाग्नि से मानव, पशु एवं वन सम्पदा की रक्षा हेतु प्रभावी भूमिका निभाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में बालिकाओं एवं महिलाओं की सुरक्षा के प्रति अत्यन्त संवेदनशील है और इसे अपनी शीर्ष प्राथमिकता पर रखते हुये अपराधियों के विरूद्ध कठोर से कठोर कार्यवाही कर रही है। इसी क्रम में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने के उद्देश्य से एप बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसमें पंजीकरण के उपरान्त महिलाओं को प्रभावी सुरक्षा दी जा सकेगी।

 

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Hill Mail

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