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गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक, कई मुद्दों पर लिए गए निर्णय

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के नरेन्द्र नगर में मध्य क्षेत्रीय परिषद परिषद की 24वीं बैठक की अध्यक्षता की, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका सलाहकार से बदलकर एक्शन प्लेटफार्म के रूप में कारगर साबित हुई है। नरेन्द्र मोदी ने हमेशा सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने पर बल दिया है और क्षेत्रीय परिषदों ने समस्याओं का समाधान निकालने, वित्तीय समावेशन बढ़ाने और नीतिगत बदलावों में उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है।

अमित शाह ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद में शामिल राज्य देश में कृषि, पशुपालन, अनाज उत्पादन, खनन, जल आपूर्ति और पर्यटन का प्रमुख केन्द्र हैं, इन राज्यों के बिना जलापूर्ति की कल्पना ही नहीं की जा सकती। मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के टीम इंडिया के कांसेप्ट को जमीन पर उतारा है। गृह मंत्री ने कहा कि बच्चों में कुपोषण की समस्या को पूरी संवेदनशीलता के साथ दूर करना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। बैठक में निर्णय लिया गया कि लाख उत्पादन को संशोधित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में शामिल करने के लिए आईसीएआर द्वारा अध्य्यन किया जाएगा, इससे लाख उत्पादन से जुड़े किसानों को फायदा होगा।

गृहमंत्री ने सहकारिता, स्कूली बच्चों की ड्रॉप आउट दर और कुपोषण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता बताते हुए सभी सदस्य राज्यों से इन पर खास ध्यान देने को कहा। बैठक में कोदो और कुटकी उपज के मूल्य को रागी के एमएसपी के बराबर तय करने का भी निर्णय लिया गया, इस फैसले से देशभर, विशेषकर मध्य क्षेत्रीय परिषद के सदस्य राज्यों के करोड़ों किसानों को फायदा होगा। 5 किमी के दायरे में हर गांव तक बैंकिंग सुविधा, देश में 2 लाख नई पीएसीएस के गठन, रॉयल्टी और खनन संबंधित मुद्दों और वामपंथी उग्रवाद-प्रभावित जिलों में बुनियादी सुविधाओं के निर्माण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

बरसाती नदियों को ग्लेशियर आधारित नदियों से जोड़ने पर बल

मध्य क्षेत्रीय परिषद की नरेंद्र नगर में आयोजित बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित प्रतिभाग कर रहे अन्य महानुभावों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वपूर्ण बैठक को उत्तराखण्ड में आयोजित किये जाने के लिये केंद्रीय गृह मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद केंद्र तथा राज्यों के मध्य आपसी सहयोग एवं समान प्रकार के मामलों में सेतु के समान है। परिषद आपसी विचारों एवं अनुभवों को साझा करने का भी सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में उत्तराखण्ड से संबंधित कतिपय नीतिगत विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड का 71 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्तराखण्ड में अवस्थापना सुविधाओं के विकास तथा आवश्यक सेवाओं के सृजन में अन्य राज्यों की अपेक्षा लागत अधिक रहती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यावरणीय प्रतिबंधों के कारण विकास कार्यों के संचालन में कतिपय कठिनाइयां रहती है, जबकि हमारे आर्थिक संसाधन भी सीमित हैं। इन परिस्थितियों एवं संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बावजूद राज्य की प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औरत से लगभग दो गुना करने में हम सफल हुए हैं, तथा राज्य के विकास की दिशा में कई उपलब्धियां हासिल कर उत्तराखण्ड को उत्कृष्ट एवं आदर्श राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड से निकलने वाली गंगा, यमुना, काली सहित अनेक बारहमासी नदियां मैदानी क्षेत्रों की जीवन रेखा भी है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि वैज्ञानिक आधार पर बरसाती नदियों को ग्लेशियर आधारित नदियों से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया जाना चाहिए, इसका लाभ न केवल उत्तराखण्ड को बल्कि पूरे देश को होगा। इसके लिये उत्तराखण्ड सहित अन्य मध्य क्षेत्रीय राज्यों को केंद्र सरकार से तकनीकि एवं वित्तीय सहयोग दिये जाने पर भी उन्होंने बल दिया।

सीमांत क्षेत्रों में सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत

उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऑल वेदर रोड के अन्तर्गत राज्य में तेजी से काम हो रहा है परन्तु इसे सीमान्त क्षेत्र तक बढ़ाने की आवश्यकता है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन की तर्ज पर राज्य के दूसरे मण्डल में टनकपुर से बागेश्वर रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना भी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का आपदाओं जैसे भूस्खलन, अतिवृष्टि, वनाग्नि, ग्लेशियर खिसकना इत्यादि से चोली दामन का साथ है। इसके लिए राज्य को एक सशक्त वेदर फोर कास्टिंग सिस्टम, डॉप्लर रडार से युक्त अवस्थापना की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 को ‘‘अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट ईयर‘‘ घोषित किया गया है, अतः मिड डे मील में अनिवार्य रूप से बच्चों को मिलेट प्रदान किया जाए ताकि बच्चे स्वस्थ रहें, इस बारे में शिक्षा मंत्रालय तथा खाद्य मंत्रालय के समन्वय से समुचित कार्यवाही किए जाने का भी मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया।

25वीं बैठक काशी विश्वनाथ में किए जाने का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में दुनिया ने देश के सामर्थ्य और शांति के प्रदर्शन को स्वीकार किया है। विभिन्न क्षेत्रों की परिषदों की बैठकों का आयोजन केंद्र राज्य संबंधों को बेहतर बनाने का कार्य कर रहे है जो समस्याओं के समाधान का उपयुक्त मंच बन रहा है। उन्होंने मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक काशी विश्वनाथ की नगरी में आयोजित किये जाने का भी प्रस्ताव रखा।

उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बीमारू से समृद्ध राज्य के रूप में पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान उत्तराखण्ड व हिमाचल के साथ हिमालयी राज्यों को आपदा की समस्या का सामना करना पड़ा है। अब कई नए क्षेत्र भी इसमें शामिल हो रहे है। इसके लिए उन्होंने नदियों के केचमेंट एरिया को सुरक्षित किये जाने के साथ ही नदियों के चैनलाइजेशन की दिशा में पहल किये जाने की बात कही।

उन्होंने आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं को रोकने में भी मिशन मोड में कार्य करने पर बल दिया। मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में भी सभी राज्य आपसी सहभागिता से इस दिशा में क्या कुछ बेहतर कर सकते है इस पर चिन्तन किये जाने की उन्होंने जरूरत बतायी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल, सुबोध उनियाल, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस संधु के साथ ही सचिव गण उपस्थित थे।

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Hill Mail

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