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प्राकृतिक रूप से पुरानी बीमारियों का उपचार एवं रोकथाम पर व्याख्यान

पंतनगर विश्वविद्यालय के गांधी हाल में 30 सितम्बर 2024 को छात्र कल्याण विभाग द्वारा प्राकृतिक रुप से पुरानी बीमारियों के उपचार के संबंध में ‘प्लांट बेस्ड वेलनेस फाउंडेशन’ के ललित एम. कपूर के व्याख्यान का आयोजन किया गया।

ललित एम. कपूर द्वारा अपनी जीवन शैली को बदलकर फलों, सब्जियों एवं प्राकृतिक अनाजों के सेवन से असाध्य रोगों से मुक्ति पाने के विशय पर विस्तार से चर्चा की गयी। उन्होंने व्याख्यान द्वारा बताया की उक्त रक्तचाप, मधुमेह, गाउट, हृदय रोग इत्यादि कई पुरानी बीमारियों को पौधों पर आधारित भोजन के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। व्याख्यान में पंतनगर विश्वविद्यालय के छात्रों, प्राध्यापकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा प्रतिभाग कर शोध आधारित व्याख्यान से लाभ प्राप्त किया गया।

ललित कपूर ने बताया की जीवन शैली में बदलाव और पौधों पर आधारित संपूर्ण भोजन अपनाकर बीमारियों को दूर किया जा सकता है और पौधों पर आधारित भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये किसानों का खेती विशेषकर जैविक खेती के लिए प्रेरित किये जाने की आवश्यकता है। स्वस्थ जीवन शैली के पांच स्तम्भों यथा भोजन, विशाक्त पदार्थों का निश्कासन, शारीरिक घड़ी, व्यायाम तथा भावनात्मक एवं आध्यात्मक जुड़ाव पर जोर देते हुए बताया कि स्वच्छ शाकाहारी भोजन लम्बी आयु प्राप्त करने का आधार है।

कार्यक्रम की अध्यक्षा कार्यवाहक कुलपति डॉ. अलका गोयल, अधिष्ठात्री, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय द्वारा की गई। डॉ. गोयल ने ललित कपूर की बातों का समर्थन करते हुए परिवार में बड़े बुर्जगों का आदर एवं उनसे भावनात्मक लगाव बनाये जाने पर बल दिया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. आनन्द सिंह जीना द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया गया तथा अपर अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. ओम प्रकाश द्वारा ललित कपूर का जीवन परिचय प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. शोभित गुप्ता, सह अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डॉ. श्वेता राय, सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

ललित कपूर, आईआईटी कानपुर (1971) से स्नातक और यूसीएलए से एमबीए, सिलिकॉन वैली में एक सफल उद्यमी थे। उनकी बढ़ती उम्र के साथ उनमें जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियां विकसित होने लगीं और उन्होंने अपने आहार एवं जीवनशैली में बदलाव करके उन्हें दूर करने का फैसला किया। इस क्षेत्र में आशातीत सफलता हासिल होने पर उन्होंने अपने सफल उद्यम को छोड़कर लोगों के रोगों को पौधों पर आधारित भोजन के माध्यम से ठीक करने का बीड़ा उठाया एवं पौधों पर आधारित ख़ान पान से संबंधित एक एनजीओ की स्थापना की।

इस कार्य में ‘उन्हें न्यूट्रिशन एवं प्लान्ट आधारित संपूर्ण खाद्य क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों जैसे डॉ. कॉलिन कैंपबेल, डॉ. जॉन मैकडॉगल, डॉ. कैल्डवेल एस्सेलस्टिन आदि लोगों के कार्यों का अध्ययन करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गाउट, हृदय रोग, हाइपोथायरायडिज्म, प्रोस्टेट, ऑस्टियोआर्थराइटिस, स्लीप एपनिया, मोटापा और सीजनल (मौसमी) एलर्जी सहित पुरानी बीमारियों को हज़ारों लोगों में सफलतापूर्वक समाप्त किया और लोगों के जीवन में पुनः नवीन ऊर्जा का संचार किया!

वह अपने आईआईटी कानपुर बैचमेट्स के लिए प्रेरणास्रोत बन गए और उन्होंने अपने इस ज्ञान को साझा करने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप शुरू किया। इससे कई लोगों को लाभ हुआ और उनकी पुरानी बीमारियां सफलतापूर्वक ठीक हो गईं। उनके इन कार्यो का प्रचार हुआ और सोशल मीडिया ग्रुपों की संख्या बढ़ गई। उन्होंने डॉ. योशिनोरी ओहसुमी (2016) की ऑटोफैगी पर नोबेल पुरस्कार विजेता रिसर्च, सर्कैडियन रिदम पर डॉ. जेफरी हॉल (2017) और इम्यूनोथेरेपी पर डॉ. तासुकु होन्जो (2018) के रिसर्चों की भी अनुशंशा की। उनके सदस्यों को अब केवल दो सप्ताह में ही सुधार दिखाई दे रहा है। उन्होंने 500 से अधिक सत्रों का आयोजन किया है, जिसमें 50 से अधिक देशों के 2,00,000 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया और जिसमें हजारों सफल कहानियां सम्मिलित हैं।

वह 100 से अधिक सक्रिय सामाजिक समूह चलाते है और उसके मासिक सत्रों में हजारों लोग नामांकन करते है। उन्होंने ‘प्लांट-बेस्ड वेलनेस फाउंडेशन’ नाम से अमेरिका और भारत में एक एनजीओ की स्थापना की, जिसके दुनिया भर में 40 से अधिक केंद्र हैं। पिछले साल, वह आईआईटी कानपुर में विजिटिंग फैकल्टी मेंबर थे और पोषण एवं स्वास्थ्य पर एक कोर्स कराया। वह टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए स्वास्थ्य और पोषण पर एक ब्लॉग भी लिखते हैं। ललित कपूर लोगों को लंबी बीमारी से प्राकृतिक तरीक़े से निजात दिलाने हेतु विभिन्न संस्थानों में सेमिनार करते हैं एवं कई स्थानों पर आवासीय रिट्रीट का भी आयोजन करते हैं!

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