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LUCC घोटाला: सीबीआई ने 46 लोगों पर केस दर्ज, जमाओं के नाम पर उड़ाए करोड़ों

उत्तराखंड में लोगों को छोटी-छोटी जमा योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का लालच देकर ठगने वाले एलयूसीसी घोटाले में बड़ा एक्शन हुआ है। सीबीआई ने कंपनी के ब्रांड एम्बेसडर सहित 46 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। राज्य में 35 शाखाओं के जरिए हजारों निवेशकों से जमा कराई गई रकम को कथित रूप से ठगी में इस्तेमाल किया गया।

उत्तराखंड में छोटे-छोटे निवेश और जमा योजनाओं के नाम पर आम लोगों से बड़ा आर्थिक फर्जीवाड़ा करने वाले लोन एंड यूटिलिटी क्रेडिट एंड पब्लिक कोऑपरेटिव सोसायटी, यानी एलयूसीसी घोटाले में अब सीबीआई की एंट्री हो चुकी है। एजेंसी ने मामले में 46 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिनमें कंपनी के ब्रांड एम्बेसडर रहे दो अभिनेताओं के नाम भी शामिल हैं। मामला सामने तब आया जब देहरादून सहित कई जिलों में निवासियों ने शिकायत दी कि सोसायटी की ओर से ‘उच्च ब्याज’ और ‘सुरक्षित जमा’ का वादा कर उनसे करोड़ों रुपये लिए गए, पर बाद में न तो रकम वापस हुई और न ही योजनाओं के अस्तित्व का कोई रिकॉर्ड मिला।

राज्य में फैली थीं 35 शाखाएँ

जांच में पता चला कि एलयूसीसी ने उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में 35 शाखाएँ खोल रखी थीं। इन्हीं शाखाओं के जरिए कंपनी ने हजारों ग्राहकों तक पहुँच बनाई और लंबे समय तक विश्वसनीयता का माहौल तैयार किया। निवेशकों को यह भरोसा दिलाया गया कि उनकी जमा राशि पूरी तरह सुरक्षित है और कुछ ही वर्षों में उन्हें दोगुना मुनाफा मिलेगा। हालांकि बाद में पता चला कि जमा की गई रकम का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया गया। सीबीआई के अनुसार, रकम का प्रवाह पारदर्शी नहीं था और कई खातों में अनियमित ट्रांजैक्शन सामने आए।

राजनीतिक गलियारों तक पहुंचा मामला

खबर यह भी है कि मामले को लेकर चार सांसदों ने राज्य के गृह मंत्री से मुलाकात कर पीड़ितों की शिकायतें उठाई थीं। उनकी मांग थी कि जमा धारकों की गाढ़ी कमाई को वापस दिलाने और दोषियों को पकड़ने के लिए उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसके बाद राज्य पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच की गई और वर्ष 2019 से इस मामले में कई चरणों पर फाइलें खंगाली गईं। लेकिन पीड़ितों की संख्या बढ़ती चली गई और स्थानीय थानों में शिकायतों का ढेर लग गया।

18 प्राथमिकी राज्य में भी हुई दर्ज

सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए केस से पहले उत्तराखंड पुलिस ने कुल 18 एफआईआर दर्ज की थीं। अधिकतर शिकायतें देहरादून, हरिद्वार और कुमाऊं के जिलों से आईं, जहाँ कई महिलाओं ने बताया कि जीवनभर की बचत इस सोसायटी में जमा कराने के बाद वे आर्थिक तंगी में आ गईं। सोसायटी के एजेंटों पर लालच देकर लोगों को योजनाओं में जोड़ने का आरोप लगा था कुछ निवेशकों के मुताबिक उन्हें बताया गया था कि “जमा राशि सरकारी अनुमोदन वाली स्कीम है।” जबकि जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला।

अब आगे क्या?

सीबीआई ने कार्रवाई तेज कर दी है और संबंधित दस्तावेजों के साथ प्रमुख आरोपियों की भूमिका की तहकीकात शुरू कर दी है। एजेंसी ने साफ संकेत दिए हैं कि जिन भी व्यक्तियों ने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की है, उन सभी पर कड़ी कार्रवाई होगी। एलयूसीसी घोटाला सिर्फ वित्तीय फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की उम्मीदों के साथ खेल है जिन्होंने अपनी जिंदगी की बचत भरोसे में देकर खो दी। अब उम्मीद यही है कि सीबीआई की जांच पीड़ितों को न्याय दिलाएगी और ऐसे घोटालों पर सख्त नकेल कसेगी।

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Hill Mail

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