बताया जा रहा है कि बीती रात क्षेत्र में मौसम अचानक खराब हो गया। तेज गर्जना और बारिश के बीच चांगसील बुग्याल में एक स्थान पर आकाशीय बिजली गिरी, जिसकी चपेट में बड़ी संख्या में भेड़-बकरियां आ गईं। सुबह जब पशुपालक अपने पशुओं को देखने पहुंचे तो वहां का दृश्य बेहद हृदयविदारक था। बड़ी संख्या में भेड़-बकरियां मृत अवस्था में पड़ी थीं। इस हादसे ने पशुपालकों को गहरे सदमे में डाल दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार चांगसील बुग्याल में हर वर्ष गर्मियों के मौसम में बड़ी संख्या में पशुपालक अपने मवेशियों को चराने के लिए ले जाते हैं। यहां की प्राकृतिक घास पशुओं के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। लेकिन इस बार प्रकृति के कहर ने वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक इस हादसे से करीब 8 से 10 पशुपालक परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में पशुपालन केवल एक व्यवसाय नहीं बल्कि जीवनयापन का मुख्य आधार है। भेड़-बकरियों की बिक्री से ही अधिकांश परिवारों की आय होती है, जिससे बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्च और अन्य आवश्यकताएं पूरी की जाती हैं। ऐसे में एक ही रात में इतनी बड़ी संख्या में पशुधन का नष्ट हो जाना इन परिवारों के लिए आर्थिक रूप से बेहद बड़ा झटका है। कई पशुपालकों ने अपनी वर्षों की कमाई और मेहनत एक पल में खो दी।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हो गई। चांगसील बुग्याल दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित होने के कारण वहां तक पहुंचने में काफी समय लग रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मौके पर पहुंचकर मृत पशुओं की वास्तविक संख्या, नुकसान का आकलन और घटना की विस्तृत जांच की जाएगी। इसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी ताकि प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जा सके।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने राज्य सरकार से प्रभावित पशुपालकों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उनका कहना है कि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर रहती है। ऐसे में इस तरह की प्राकृतिक आपदा से उबरना उनके लिए आसान नहीं होगा। ग्रामीणों ने सरकार से विशेष राहत पैकेज देने के साथ-साथ पशुधन बीमा योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। खुले बुग्यालों और ऊंचे चरागाहों में पशुओं के झुंड अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और खराब मौसम के दौरान पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था करना आवश्यक है। हालांकि कई बार मौसम अचानक बदल जाने के कारण पशुपालकों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
फिलहाल प्रशासन की टीम नुकसान का आकलन करने में जुटी हुई है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद मृत पशुओं की संख्या और आर्थिक क्षति का स्पष्ट आंकड़ा सामने आएगा। लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार यह उत्तरकाशी जिले में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी पशुधन क्षति की घटनाओं में से एक मानी जा रही है। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और प्रभावित परिवार सरकार से शीघ्र राहत एवं उचित मुआवजे की उम्मीद लगाए हुए हैं।


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