सरकार ने प्रस्तावित संशोधन विधेयक में “लघु कंपनी” (स्मॉल कंपनी) की परिभाषा का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत लघु कंपनियों की प्रदत्त शेयर पूंजी की सांविधिक सीमा को मौजूदा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये किए जाने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे तेजी से बढ़ रही कंपनियों को विस्तार के लिए अधिक अवसर मिलेंगे और वे बिना अतिरिक्त नियामकीय बाधाओं के अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकेंगी।
लोकसभा में दिए गए जवाब में केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2014-15 से केंद्र सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 और सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी) अधिनियम, 2008 के अंतर्गत कई तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया है। इस पहल का उद्देश्य व्यवसायों पर अनावश्यक कानूनी दबाव कम करना और अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाना है। इसके परिणामस्वरूप मुकदमों की संख्या में कमी आई है, कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूती मिली है और देश में कारोबार करने की सुगमता (ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस) में सुधार हुआ है।
सरकार ने कंपनियों के विलय की प्रक्रिया को भी अधिक तेज और सरल बनाने पर जोर दिया है। इसके तहत फास्ट ट्रैक मर्जर व्यवस्था का दायरा बढ़ाकर स्टार्टअप, गैर-सूचीबद्ध कंपनियों और समूह के भीतर होने वाले पुनर्गठन को भी शामिल किया गया है। इससे कंपनियों को लंबी और जटिल मंजूरी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। साथ ही ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय करने का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिससे विलय प्रक्रिया कम समय और कम लागत में पूरी हो सके।
हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इन सुधारों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार विश्वास-आधारित शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के इन कदमों से ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के साथ-साथ ईज़ ऑफ कम्प्लायंस को भी नई मजबूती मिलेगी। इससे देश में निवेश का माहौल बेहतर होगा, उद्योगों को गति मिलेगी और भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड जैसे उभरते हुए राज्य के लिए ये सुधार विशेष रूप से महत्वपूर्ण साबित होंगे। उनके अनुसार राज्य में उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र को इन बदलावों का सीधा लाभ मिलेगा। व्यवसायों के लिए नियमों का सरलीकरण, त्वरित अनुमोदन प्रक्रिया और अनुपालन संबंधी बोझ में कमी से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा नए उद्योग स्थापित करने का मार्ग आसान होगा।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार संसदीय क्षेत्र सहित पूरे उत्तराखंड में स्थानीय उद्यमिता को इससे नई ऊर्जा मिलेगी। उद्योगों के विस्तार और नए निवेश के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे राज्य की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य ऐसा सक्षम, पारदर्शी और विश्वास-आधारित कॉरपोरेट पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जहां उद्योग, निवेशक और युवा उद्यमी बिना अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं के अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रस्तावित कॉरपोरेट विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा तथा इसका लाभ उत्तराखंड समेत पूरे देश को मिलेगा।


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