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केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मिले गढ़वाल सांसद, गैरसैंण, रामनगर, यमकेश्वर और देवप्रयाग में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग

उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार और पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने को लेकर पहल तेज हो रही है। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रलाद जोशी से भेंट की। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड में शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हुए राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

इस मुलाकात के दौरान उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की मांग को एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष रखा गया। इस संबंध में मंत्री से आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया।

गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी होने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखा जाता है। यहां केंद्रीय विद्यालय की स्थापना होने से गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का बेहतर अवसर मिल सकता है।

इसके साथ ही रामनगर, यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र और देवप्रयाग में भी केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना का अनुरोध किया गया। इन क्षेत्रों में केंद्रीय विद्यालय खुलने से स्थानीय विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध होने के साथ आसपास के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा के अवसर बढ़ाने पर जोर

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। राज्य के अनेक पर्वतीय क्षेत्रों में विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर केंद्रीय विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की स्थापना विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

केंद्रीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के साथ बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विभिन्न सह-शैक्षणिक गतिविधियों के अवसर उपलब्ध होते हैं। गैरसैंण, यमकेश्वर और देवप्रयाग जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसे विद्यालय स्थापित होने से दूरस्थ इलाकों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र के आसपास ही बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। वहीं, रामनगर जैसे क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना आसपास के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।

शिक्षा मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रलाद जोशी के समक्ष रखी गई मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय में आवश्यक कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना राज्य के विद्यार्थियों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना से न केवल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि इन क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेष रूप से ग्रामीण और पर्वतीय पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों के लिए यह अवसर उनके शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में कदम

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि इन प्रतिभाओं को बेहतर शिक्षा, संसाधन और उचित अवसर उपलब्ध कराए जाएं। गैरसैंण, रामनगर, यमकेश्वर और देवप्रयाग में केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना की मांग इसी सोच के अनुरूप है।

यदि इन प्रस्तावों को स्वीकृति मिलती है, तो इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही अभिभावकों को अपने बच्चों की शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

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