उत्तराखंड में पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत पुलिस आरक्षी, उपनिरीक्षक, प्लाटून कमांडर, अग्निशामक, बंदी रक्षक, वन आरक्षी, वन दरोगा, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय रक्षक जैसे पद शामिल किए गए हैं। सरकार ने वर्दीधारी सेवाओं में अग्निवीरों के लिए आरक्षण से संबंधित नियम भी लागू किए हैं।
गृह सचिव शैलेश बगौली के अनुसार, विभिन्न विभागों में उपलब्ध रिक्त पदों का ब्योरा केंद्र को भेजा गया है। यह प्रक्रिया उन युवाओं के लिए सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में की गई है, जो अग्निवीर के रूप में चार वर्ष की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद राज्य की सरकारी सेवाओं में अपना करियर आगे बढ़ाना चाहते हैं।
अग्निवीर रोजगार सेल बनाने की तैयारी
राज्य सरकार ने अग्निवीरों के लिए केवल सरकारी नौकरी के विकल्प तक अपनी तैयारी सीमित नहीं रखी है। अगस्त 2026 में उत्तराखंड कैबिनेट ने अग्निवीर रोजगार सेल के गठन को मंजूरी दी थी। प्रस्तावित सेल मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन काम करेगा और पूर्व अग्निवीरों को रोजगार, उच्च शिक्षा तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में काम करेगा।
सरकार की योजना सैन्य सेवा के दौरान अग्निवीरों को मिले प्रशिक्षण और कौशल का इस्तेमाल उनकी आगे की पेशेवर यात्रा में कराने की है। अनुशासन, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्राप्त अनुभव को रोजगार के विभिन्न अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
भर्ती नियमों में बदलाव पर भी विचार
पूर्व अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में अवसर देने के लिए भर्ती प्रक्रिया में कुछ अतिरिक्त राहत देने पर भी विचार चल रहा है। सितंबर 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, केंद्र के गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद राज्य सरकार कुछ भर्तियों में अग्निवीरों को लिखित और शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट देने के संबंध में नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। हालांकि, इसके लिए संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
पहली खेप की वापसी से पहले तैयारियां
अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों की पहली खेप अब सेवा अवधि पूरी करने के बाद वापस लौटने लगी है। उत्तराखंड में भी पहली खेप के लौटने से पहले राज्य सरकार ने रोजगार से जुड़ी व्यवस्थाओं को गति दी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मई 2026 में प्रदेश के 4,500 से अधिक युवा अग्निवीर के तौर पर सेना में सेवाएं दे रहे थे।
नौसेना और वायुसेना के अग्निवीरों की पहली खेप नवंबर-दिसंबर 2026 से वापस आनी शुरू होने की संभावना है, जबकि सेना से पहली बड़ी खेप जनवरी 2027 में लौटेगी। ऐसे में 181 पदों का ब्योरा केंद्र को भेजना और रोजगार सेल की तैयारी को अग्निवीरों की सेवा समाप्ति के बाद की व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकार की योजना पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरी के साथ-साथ शिक्षा और स्वरोजगार के विकल्प उपलब्ध कराने की भी है। आने वाले समय में संबंधित विभागों की रिक्तियों, आरक्षण व्यवस्था और भर्ती नियमों के आधार पर पात्र पूर्व अग्निवीरों को इन अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।


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