नमो क्रिकेट लीग में देश के विभिन्न हिस्सों से 30 से अधिक टीमों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री धामी के मैदान पर उतरकर खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेलने से वहां मौजूद खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल के मैदान में उतरने का अपना अलग आनंद है। खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेलकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, धैर्य और टीम भावना भी मजबूत होती है। खेल का मैदान व्यक्ति को जीत में विनम्र रहने और हार से सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में यदि कोई लत लगानी है तो खेल और फिटनेस की लत लगाएं और यदि कोई जुनून पालना है तो अपने सपनों तथा लक्ष्यों को हासिल करने का जुनून पालें।
सीएम धामी ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा नशे में नहीं, बल्कि खेल, रचनात्मक गतिविधियों और राष्ट्र निर्माण में लगनी चाहिए। उन्होंने नशे के दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि नशा केवल व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके परिवार और पूरे समाज पर भी इसका असर पड़ता है। एक युवा नशे से बचेगा तो एक परिवार बचेगा, परिवार सुरक्षित रहेगा तो समाज मजबूत होगा और मजबूत समाज से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से संवाद करते हुए उनकी प्रतिभा और उत्साह की सराहना की तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी नशे के खिलाफ जागरूक करने का आह्वान किया। इस दौरान उपस्थित खिलाड़ियों और युवाओं ने नशे से दूर रहने तथा खेल को अपनाने का संकल्प लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को नई पहचान मिली है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसे अभियानों ने युवाओं को खेल और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अब देश के गांवों और छोटे शहरों से निकलने वाली प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं।
हरियाणा की खेल प्रतिभाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां के खिलाड़ियों ने ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स और राष्ट्रमंडल खेलों सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सफलता के पीछे वर्षों का परिश्रम, अनुशासन, संघर्ष और लक्ष्य के प्रति समर्पण होता है।
मुख्यमंत्री ने बदलती सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले खेलों को लेकर ‘खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब’ जैसी धारणा सुनने को मिलती थी, लेकिन आज परिस्थितियां बदल गई हैं। अब खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर और मंच मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज यह कहना अधिक उचित होगा कि ‘खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे लाजवाब।’


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