Home ताज़ा ख़बर पौड़ी के गांवों में फिर लौटा खौफ: गुलदार ने 47 वर्षीय व्यक्ति को बनाया शिकार
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पौड़ी के गांवों में फिर लौटा खौफ: गुलदार ने 47 वर्षीय व्यक्ति को बनाया शिकार

पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष चिंता का विषय बनता जा रहा है। जंगलों का क्षेत्र घटने और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण जंगली जानवर अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने लगे हैं।

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में एक बार फिर गुलदार का आतंक बढ़ गया है। इलाके के कई गांवों में पिछले कुछ दिनों से गुलदार की गतिविधियां देखी जा रही थीं, जिससे ग्रामीणों में पहले से ही डर का माहौल बना हुआ था। इसी बीच घुड़दौड़ी क्षेत्र के बलमणा गांव में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। गुलदार के हमले में 47 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे इलाके में शोक, गुस्सा और भय का माहौल बन गया है।

घात लगाकर किया हमला

जानकारी के अनुसार यह घटना घुड़दौड़ी क्षेत्र के बलमणा गांव में हुई। मृतक व्यक्ति गांव के पास ही किसी काम में लगा हुआ था। इसी दौरान घात लगाकर बैठे गुलदार ने अचानक उस पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज और अचानक था कि व्यक्ति को संभलने का भी मौका नहीं मिला। आसपास के लोगों ने शोर मचाकर गुलदार को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक वह व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल कर चुका था। घटना की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए।

पहले से दिख रही थी गुलदार की गतिविधि

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से इलाके में गुलदार की आवाजाही लगातार देखी जा रही थी। कई लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को भी दी थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि अगर वन विभाग पहले से गश्त बढ़ाता, पिंजरे लगाता या अन्य सुरक्षा इंतजाम करता, तो शायद इस तरह की दुखद घटना को रोका जा सकता था।

प्रशासन और वन विभाग मौके पर पहुंचा

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। गांव में बढ़ते आक्रोश और ग्रामीणों के भारी विरोध को देखते हुए संयुक्त मजिस्ट्रेट ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर दिया। इसके साथ ही उसे मारने के आदेश भी जारी कर दिए गए। इस दौरान गुस्साए ग्रामीणों ने कुछ अधिकारियों को कुछ समय के लिए रोक भी लिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।

ग्रामीणों की मांग: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक गुलदार को पकड़ा या मारा नहीं जाता, तब तक गांव के लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि गांव के आसपास लगातार गश्त बढ़ाई जाए, प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाए जाएं, रात के समय विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाए और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं।

बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष

विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष चिंता का विषय बनता जा रहा है। जंगलों का क्षेत्र घटने और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण जंगली जानवर अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने लगे हैं।

पौड़ी की यह घटना एक बार फिर इस गंभीर समस्या को उजागर करती है। अब सबकी नजर प्रशासन और वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी है कि वे इस खतरे से ग्रामीणों को कितनी जल्दी राहत दिला पाते हैं।

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Hill Mail

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