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अग्नि-5 की जद में आया चीन और यूरोप

A5_02 (3)(1)भारत ने सतह से सतह पर मार करने वाली अंतर महाद्वीपीय मिसाइल अग्नि-5 का 15 सितम्बर को दूसरा सफल परीक्षण किया है। अग्नि-5, चीन और अधिकांश यूरोप तक मार करने वाली पहली मिसाइल है। ओडिशा के ंव्हीलर द्वीप से साढ़े आठ बजे हुई अग्नि-पांच की दूसरी परीक्षण उड़ान ने इसे सेना में शामिल करने के करीब पहुंचा दिया है। परमाणु हमले में सक्षम इस प्रक्षेपास्त्र के सहारे भारत 5,000 किमी से अधिक दूरी तक वार कर सकता है।

रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रवक्ता रवि गुप्ता ने कहा कि इस परीक्षण के दौरान तीन चरणों वाली अग्नि-5 ने निर्धारित लक्ष्य पर सटीक वार किया। उनके मुताबिक अप्रैल, 2012 के बाद हुए इस सफल परीक्षण से प्रक्षेपास्त्र के उत्पादन और सेना में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इस सफलता के लिए रक्षा वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए परीक्षण को अहम उपलब्धि बताया। अभी इसका एक परीक्षण और किया जाना है। इस मिसाइल को 2015 तक सेना में शामिल करने का लक्ष्य है। रवि गुप्ता ने बताया कि यह मिसाइल सभी पैमानों पर खरा उतरी है।

अस्सी प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी उपकरणों से बनी इस मिसाइल ने भारत को नाभिकीय बम के साथ सुदूर लक्ष्य पर सटीक वार करने वाली अतिजटिल तकनीक का रणनीतिक रक्षा कवच दिया है। इसके जरिए भारत अपने किसी भी हमलावर को भरोसेमंद पलटवार क्षमता के साथ मुंहतोड़ जवाब दे सकता है। इस प्रक्षेपास्त्र से भारत जरूरत पड़ने पर चीन के किसी भी इलाके में वार कर सकेगा। सतह से सतह पर मार करने वाली यह मिसाइल पूरे एशिया, ज्यादातर अफ्रीका व आधे से अधिक यूरोप तथा अंडमान से छोड़ने पर आस्ट्रेलिया तक पहुंच सकती है। यह एक टन तक के परमाणु बम गिरा सकती है। अग्नि-पांच भारत की सबसे तेजी से विकसित मिसाइल है, जिसे महज तीन साल में तैयार किया गया है। इसे बनाने की घोषणा दिसम्बर, 2008 में की गई थी।

अग्नि-पांच को अचूक बनाने के लिए भारत ने माइक्रो नेवीगेशन सिस्टम, कार्बन कंपोजिट मैटेरियल से लेकर मिशन कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर तक ज्यादातर चीजें स्वदेशी तकनीक से विकसित कीं। अग्नि-5 भारत को ऐसे मुल्कों के प्रतिष्ठित क्लब में जगह दिलाने वाला प्रक्षेपास्त्र है, जिनके पास 5,000 किमी से अधिक दूरी तक मार करने वाले अंतर महाद्वीपीय प्रक्षेपास्त्र हैं। रक्षा वैज्ञानिकों के मुताबिक इस मिसाइल के जरिए भारत दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट कर सकता है और जरूरत पड़ने पर अपने छोटे उपग्रह लांच कर भी सकता है।

हिलमेल ब्यूरो

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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