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उत्तराखंड के निर्माता का महाप्रयाण

राज्य गठन के बाद वाजपेयी के कार्यकाल में ही उत्तराखंड को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा भी मिला। उत्तराखंड से विशेष लगाव और यहां अपना घर बनाने की चाहत रखने वाले वाजपेयी की स्मृतियां इस हिमालयी राज्य की धरोहर हैं।

हिल-मेल ब्यूरो

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को न सिर्फ उत्तराखंड के जन्मदाता के रूप में याद किया जाएगा बल्कि वह इस पहाड़ीसूबे की शुरुआत से खुले दिल से परवरिश करने के लिए भी याद किए जाएंगे। वर्ष 1994 में जब पृथक राज्य आंदोलन के बड़ा आकार लेने के बावजूद ऐसा लग रहा था कि अलग उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना कभी मूर्त रूप नहीं ले पाएगी, 1998 में केंद्र में वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा सरकार आने के बाद यह भरोसा मजबूत हुआ।

1998 में वाजपेयी सरकार अलग राज्य के निर्माण के लिए संसद में विधेयक लाई लेकिन सरकार के गिर जाने के कारण यह पारित नहीं हो पाया। अगले साल 1999 में दोबारा सत्तारूढ़ होने पर वाजपेयी सरकार फिर विधेयक लाई। कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया और उत्तराखंड के निर्माण का रास्ता साफ हो गया।

वर्ष 2002 में प्रदेश में हुए पहले विधानसभा चुनावों के ठीक बाद मार्च में होली के मौके पर वाजपेयी प्रधानमंत्री के रूप में उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल प्रवास पर आए और राजभवन में ठहरे। वह छुट्टी के मूड में थे और ज्यादा लोगों से नहीं मिले लेकिन राज्य के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायणदत्त तिवारी से उत्तराखंड को लेकर उन्होंने लंबी वार्ता की।

दोनों पुराने मित्रों के बीच हुई इस वार्ता का परिणाम उत्तराखंड के लिए जबरदस्त सौगात के रूप में सामने आया। अपने प्रवास के आखिरी दौर में वाजपेयी ने नैनीताल राजभवन में स्वयं एक पत्रकार वार्ता कर उत्तराखंड के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं और यह साबित कर दिया कि वह दलगत राजनीति से ऊपर थे। वाजपेयी ने पर्वतीय राज्यों, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए दस वर्ष का औद्योगिक पैकेज घोषित किया, जिसकी खास बात यह थी कि वहां अगले 10 सालों में इन राज्यों में अपनी इकाइयां स्थापित करने वाले उद्योगों को 10 वर्ष तक कर रियायत का लाभ मिला। इस पैकेज के कारण टाटा मोटर्स, नैस्ले, ब्रिटानिया, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकार्प, महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी देश की नामचीन कंपनियों ने प्रदेश के हरिद्वार और पंतनगर क्षेत्रों में अपनी इकाइयां लगाईं।

वाजपेयी के कार्यकाल में ही उत्तराखंड को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा भी मिला जिसमें विकास कार्यों के लिए मिलने वाले ऋण का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार अनुदान के रूप में देती है और केवल 10 फीसदी भाग राज्य सरकार को वहन करना होता है। अपने संसाधन जुटा रहे उत्तराखंड जैसे नव निर्मित राज्य को इस दर्जे से बहुत सहूलियत मिली।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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