हिल-मेल ब्यूरो
उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय इलाकों में चकबंदी करने के लिए सरकार जल्दी ही चयनित गांवों का डिजिटल सर्वे करायेगी। इससे चकबंदी करने में आसानी होगी। जमीन का संटवारा व बंटवारा की रजिस्ट्री कराने में भी सरकार छूट दे सकती है। यह बात कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने सरकारी आवास पर अधिकारियों की बैठक में कही।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार चकबंदी में तेजी लाने के प्रयास कर रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि किसी गांव के बीस या बीस से अधिक किसान चकबंदी के लिए सहमत होते हैं तो उन्हें मदद दी जाए। राज्य में कृषि भूमि के नक्शे भी डिजिटल किए जा रहे हैं। सरकार राज्य में कृषि के विकास के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है जिससे किसानों की आय दोगुनी हो सके।
चकबंदी से जहां काश्तकार को एक मुश्त भूमि मुहैया हो सकेगी वहीं दूसरी ओर सरकार की किसानों की आय दोगुनी करने की योजना को भी पंख लगेंगे, साथ ही पलायन पर भी अंकुश लग सकेगा। यह बात सुबोध उनियाल ने कुछ समय पहले विधान सभा के सभागार में चकबंदी बंदोबस्त व राजस्व परिषद से जुड़े अधिकारियों की बैठक लेते हुए कही थी।
इस बैठक में अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि चकबंदी के लिए डाक्यूमैन्ट्री फिल्म का निर्माण कर लिया गया है। इस अवसर पर पर्वतीय क्षेत्रों के लिए जोत चकबंदी एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 2018 तथा तत्सम्बन्धी प्रस्तावित नियमावली के पुनरावलोकन हेतु गठित समिति ने बताया कि बैनामा दाखिल खारिज से लेकर खाता खतौनी का मिलान कर गांववासियों की सहमति से चकबंदी के कार्यों में तेजी लाई जा सकती है।
पहले चरण में सरकार ने चकबंदी के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का गांव खैरासैंण, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ का गांव पंचूर और कृषि मंत्री का गांव औणी का चयन किया गया था। अधिकारियों ने कृषि मंत्री को बताया कि इन गांवों में चकबन्दी समितियों का गठन, खाता-खतौनियों का सत्यापन कर लिया गया है तथा डिजीटल सर्वे का कार्य किया जाना है।


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