अगर मन में सच्ची लगन हो और दिल में कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो कोई भी कार्य असम्भव नहीं होता यही कारनामा कर दिखाया है मसूरी के माधव भारद्वाज ने। जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत के दम पर आइएससी परीक्षा में 97.50 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। यह सच ही है प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती।
माधव दोनों हाथों से विकलांग हैं, लेकिन उसने कभी भी इस शारीरिक कमी को आडे़ नहीं दिया। उसने अपनी सफलता का श्रेय पिता और गुरुजनों को देते हुए कहा कि उनका अगला लक्ष्य साफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद आइएएस बनकर देश की सेवा करना है।
बेटे की सफलता से उत्साहित भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत अधिकारी माधव के पिता रामकुमार भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने बेटे को कभी किसी चीज की कमी नहीं खलने दी। उसे यह अहसास नहीं होने दिया कि वह किसी भी प्रकार से शारीरिक रूप से दुर्बल है।
माधन ने कक्षा 10 में भी 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। वह बताता है कि अपंगता मेरी मेहनत और सफलता में कहीं भी आड़े नहीं आई है।
माधव के पिता भारतीय वायुसेना में 1964 से 1988 तक बतौर वारंट ऑफिसर सेवा दे चुके हैं। उनकी माता माला भारद्वाज भी सामाजिक विज्ञान व संस्कृत में स्नातकोत्तर डिग्री धारक हैं और एक सफल गृहणी हैं।
हिलमेल ब्यूरो


Leave a comment