हिल मेल ब्यूरो, देहरादून
उत्तराखंड को हर्बल स्टेट बनाने की दिशा में तेजी से प्रयास हो रहे हैं। सोमवार को ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट, उत्तराखंड और पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित किया जाएगा।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की मौजूदगी में सीएम आवास पर एमओयू पर उत्तराखंड जनजाति कल्याण के निदेशक सुरेश जोशी और पतंजलि की ओर से आचार्य बालकृष्ण ने हस्ताक्षर किए।
यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के जनजाति मामलों के मंत्रालय के सहयोग से संचालित किया जाएगा। पतंजलि आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उत्तराखंड की जनजाति, यहां मिलने वाली जड़ी-बूटी और परंपरागत ज्ञान के संरक्षण, उनके प्रयोगों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, अनुसंधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे जनजाति का जीवन समृद्धशाली होगा।
उत्तराखंड की Tribes,यहाँ मिलनेवाली जड़ीबूटी व परंपरागत ज्ञान के संरक्षण,उनके प्रयोगों को Scientific training,अनुसंधान हेतु Tribal Dept.व PRI का MOU @tsrawatbjp जी की उपस्थिति में हुआ इससेTribes का जीवन समृद्धशाली होगा,उत्तराखंड को HerbalState बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगा| pic.twitter.com/9PtAnx13Jo
— Acharya Balkrishna (@Ach_Balkrishna) March 16, 2020
खासतौर से उत्तराखंड के जनजाति क्षेत्रों में पाए जाने वाले औषधीय पौधों और वहां प्रचलित परंपरागत इलाज पद्धतियों पर शोध कर उनका डाक्यूमेंटेशन किया जाएगा। फिलहाल यह कार्य पायलट आधार पर शुरू किया जा रहा है। भारत सरकार ने इसके लिए 3 करोड़ 12 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। बाद में प्रोजेक्ट का विस्तार अन्य राज्यों में भी किया जाएगा जिसमें नोडल एजेंसी ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट उत्तराखंड रहेगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हमारे परंपरागत ज्ञान को समृद्ध कर उसे पूरी प्रामाणिकता के साथ डाक्यूमेंट किए जाने की जरूरत है। परंपरागत ज्ञान और विज्ञान को साथ लेना होगा। जड़ी-बूटियों के उपयोग के साथ उनके संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए जनजाति क्षेत्रों में परंपरागत रूप से कार्यरत लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। औषधीय पौधों को चिह्नित कर उनमें पाए जाने वाले तत्वों का पता लगाया जाएगा। पौधों का विस्तार में मोनोग्राफ तैयार किया जाएगा।


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