लॉकडाउन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सरकारी आवास में बैठे-बैठे पुराने साथियों और वरिष्ठ नेताओं को फोन कर रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो पीएम मोदी ऐसे 100 से ज्यादा लोगों को फोन कर चुके हैं। गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी संगठन के काम से अक्सर उत्तराखंड आते रहते थे। उनका पहाड़ से विशेष लगाव है। आज देशभर की तमाम जिम्मेदारियों के चलते भले ही उनका पहाड़ आना कम होता हो पर उनका पहाड़-प्रेम कम नहीं हुआ है। पिछले कुछ दिनों में वह उत्तराखंड में बिताए पुराने दिनों को याद करते हुए कई नेताओं को फोन लगा चुके हैं।
इस बार बारी थी देहरादून के रहने वाले डॉ. बालेश्वर पाल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन किया तो डॉ. पाल गदगद हो गए। भाजपा के वरिष्ठ नेता पाल ने बताया कि पीएम ने उनसे कोरोना महामारी से पैदा हुए हालात के बारे में जानकारी ली और उनका हालचाल पूछा।
74 साल के डॉ. पाल ने पीएम मोदी को बताया कि देहरादून में हालात नियंत्रण में हैं और प्रशासन बेहतर तरीके से इस जंग को लड़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी गरीब और बेसहारा लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं।
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प्रधानमंत्री ने डॉ. पाल से उनके अनुभवों के बारे में पूछा और कोरोना संकट को लेकर उनके सुझाव भी मांगे। पीएम ने आसपास के लोगों को भी सामाजिक दूरी का पालन करने को प्रेरित करने की बात कही। देहरादून के जिलाध्यक्ष रहे डॉ. पाल सहायक प्रोफेसर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस प्रकार से सीधे कार्यकर्ता को फोन कर हालचाल लेना सम्मान की बात है।
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इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अप्रैल को पौड़ी में मोहन लाल बौंठियाल, 23 को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रतन लाल और 24 अप्रैल को पूरन चंद्र शर्मा को हल्द्वानी फोन किया था। पूरन चंद्र से बात के दौरान पीएम ने अल्मोड़ा की मशहूर बाल मिठाई के स्वाद को याद करते हुए कहा कि वह आएंगे और साथ बैठकर बाल मिठाई खाएंगे।


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