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उत्तराखंड के लोग ध्यान दें, मास्क नहीं पहना तो 5,000 रुपये जुर्माना या…

कोरोना एक महामारी है और इससे बचने का फिलहाल एक ही तरीका है कि हम कम से कम बाहर निकलें और सामाजिक दूरी का पालन करें। हालांकि उत्तराखंड में बढ़ते मामलों के बाद भी लोगों के मास्क (mask compulsory in uttarakhand) पहनने में लापरवाही काे देखते हुए सरकार ने कानून को सख्त बना दिया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सरकारें अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रही हैं। एक तरफ संक्रमितों के इलाज पर ध्यान दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ लोगों को इससे बचाने की भी कोशिशें हो रही हैं। इसके लिए बाकायदा केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। हालांकि फिर भी कुछ लोग इसे हल्के में ले रहे हैं। उत्तराखंड में मास्क लगाना अनिवार्य किया गया है लेकिन अब शारीरिक दूरी के नियमों का उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान किया गया है।

कोरोना से बचाव एवं रोकथाम के लिए मास्क (mask compulsory in uttarakhand) नहीं पहनने और शारीरिक दूरी के नियमों का उल्लंघन करने पर 6 महीने की सजा या 5000 रुपये जुर्माना देना होगा। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने महामारी अधिनियम 1897 उत्तराखंड राज्य संशोधन अध्यादेश को स्वीकृति प्रदान कर दी। शनिवार को राज्यपाल ने महामारी अधिनियम 1897 में संशोधन करते हुए राज्य संशोधन अध्यादेश को मंजूरी दी। केरल और ओडिशा के बाद महामारी अधिनियम में बदलाव करने वाला उत्तराखंड तीसरा राज्य बन गया है।

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इसके तहत धारा 2 और 3 संशोधित होकर अब से राज्य में कोविड-19 के तहत राज्य में फेस मास्क को जरूरी करते हुए क्वारंटीन नियमों को कड़ा कर दिया गया है। अगर कोई व्यक्ति इस अध्यादेश का उल्लंघन करता पाया जाता है उसे 6 महीने की जेल या 5000 रुपये का जुर्माना देना होगा। इस एक्ट में कम्पाउंडिंग सुविधा भी नहीं है। सीधा जेल होगी।

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आपको बता दें कि उत्तराखंड में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रविवार सुबह तक कोरोना के मामले 1800 के करीब हैं। हालांकि लोग कोरोना को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। बाजारों और सड़कों पर बेवजह भीड़ बढ़ रही है और लोग बिना मास्क पहने दिख रहे हैं। ऐसे में सरकार ने कड़ा नियम बनाने का फैसला किया। यह शनिवार से ही प्रभावी हो गया है।

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