शहीद हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी की पार्थिव देह उत्तराखंड पहुंच गई है। एलओसी पर ड्यूटी के दौरान हिस्खलन की चपेट में आने के बाद राजेंद्र सिंह लापता हो गए थे। आठ महीने बाद उनकी पार्थिव देह का पता लगाया जा सका।
बुधवार को श्रीनगर के बादामी बाग कैंट में चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू और जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह ने शहीद राजेंद्र सिंह को सलामी दी। वहां से शहीद हवलदार राजेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचा। इसके बाद देहरादून स्थित सैन्य अस्पताल में लाया गया। बृहस्पतिवार को इसे उनके अंबीवाला स्थित निवास पर लाया जाएगा। शहीद का अंतिम संस्कार हरिद्वार में होगा। 15 अगस्त को राजेंद्र सिंह नेगी की यूनिट ने उनकी पत्नी को फोनकर शव मिलने की जानकारी दी।
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जम्म-कश्मीर में तैनात रहे 11 गढ़वाल राइफल्स के हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी का शव उत्तरी कश्मीर के बारामुला में स्थित गुलमर्ग इलाके से मिला। आठ जनवरी 2020 को नियंत्रण रेखा के समीप ड्यूटी देते समय हिमस्खलन की चपेट में आने पर वह लापता हो गए थे। शुरुआत में यह भी कहा गया कि वह पाकिस्तान की सीमा की तरफ गिर गए हैं। बचाव दल द्वारा कई दिनों तक तलाशी अभियान चलाने के बावजूद उनका कुछ पता नहीं चल पाया था। इसके बाद सेना ने मई 2020 में उन्हें ‘बैटल कैजुएल्टी’ घोषित कर दिया। वह मूलरूप से गैरसैंण के रहने वाले थे और उनका परिवार देहरादून के अंबीवाला में रहता है।


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