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दिल्ली में हैवानियत का शिकार हुई किरन नेगी के परिजनों से मिले सीएम त्रिवेंद्र, हरसंभव मदद का दिया भरोसा

सीएम त्रिवेंद्र सिंह ने किरन नेगी के परिजनों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि अगर परिजन चाहेंगे तो राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की तेजी से सुनवाई के लिए पैरवी करेगी और कानूनी मदद भी देगी।

दिल्ली में नौ साल पहले हैवानियत का शिकार हुई किरन नेगी को इंसाफ दिलाने के चल रही लड़ाई को अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का साथ मिला है। किरन नेगी के माता-पिता ने बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की। सीएम ने पीड़ित परिजनों को इस मामले में हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि अगर परिजन चाहेंगे तो राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की तेजी से सुनवाई के लिए पैरवी करेगी और कानूनी मदद भी देगी।

किरन नेगी के परिजनों से मुलाकात के बाद बोले सीएम त्रिवेंद्र

 

उत्तराखंड की बेटी किरन नेगी 9 फरवरी 2012 को गुडगांव स्थित कंपनी से काम करके अपनी तीन सहेलियों के साथ रात करीब 8:30 बजे नजफगढ़ स्थित छांवला कला कालोनी पहुंची थी। तभी कार में सवार तीन वहशी दरिंदों ने तीनों लड़कियों से बदतमीजी करनी शुरू कर दी। जैसे ही तीनों लड़कियां वहां से भागने लगी उसी दौरान तीनों दरिंदों ने किरन को जबरन कार में बिठाकर उसका अपहरण कर लिया। हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए इन दरिंदों ने उसका सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसकी आंखों, कानों में तेज़ाब डालकर लाश को हरियाणा के खेतों में फेंक कर चले गए। उसकी सहेलियों ने किरन के अपहरण की खबर पुलिस व उसके घरवालों को दी। लेकिन पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद उत्तराखंड समाज के लोगों ने सड़कों पर निकलकर इस घटना का जबरदस्त विरोध किया। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और 14 फरवरी को किरन की लाश पुलिस को हरियाणा में खेत से बरामद की गई। पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जिसके बाद द्वारका कोर्ट ने दोषियों को फांसी की सजा निर्धारित की और फिर हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा। अब सुप्रीम कोर्ट में इन आरोपियों की सजा पर अंतिम सुनवाई चल रही है। पहाड़ की बेटी को न्याय दिलाने के लिए उत्तराखंडी समाज लंबे समय से #JusticeforKiranNegi मुहिम चला रहा है।

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