लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) जयवीर सिंह नेगी को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का सैन्य एवं सीमांत क्षेत्र सुरक्षा का सलाहकार नियुक्त किया गया है। वह हाल ही में देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के कमांडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्हें सैन्य सेवा में परम विशिष्ट सेवा मेडल, अतिविशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल और दो बार विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि वे अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा और कुशलता के साथ निर्वहन करेंगे। उनके अनुभवों का लाभ प्रदेश को मिलेगा।

आईएमए के कमांडेंट रहते कोरोना काल में शानदार तरीके से पास आउट परेड संपन्न करवाना और आईएमए से गुजरने वाले हाईवे पर कई दशकों से अटके अंडरपास का शिलान्यास उनके कार्यकाल की उपलब्धि रही। खास बात यह है कि उनके कार्यकाल में हुई पास आउट परेड की खुद सेना प्रमुख जनरल एमएम नरावणे ने सलामी ली।
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लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नेगी 1981 में इंफ्रेंट्री की 16 डोगरा रेजीमेंट में कमीशन लिया। वह इस बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर रहे। ऑपरेशन पराक्रम के दौरान अपनी बटालियन की कमान संभाली। उत्तरपूर्व में काउंटर इंसरजेंसी, असम राइफल्स सेक्टर, लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्र में डिवीजन को कमांड किया। वेस्टर्न सेक्टर में 2 स्ट्राइक कोर की जिम्मेदारी संभाली। कई आतंकरोधी अभियान की कमान संभालने के साथ ही कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारतीय सैन्य ब्रिगेड के उप कमांडर और चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर तैनात रहे।

मूल रूप से चमोली जिले के पोखरी विकासखंड के कमद गांव के रहने वाले लेफ्टिनेंट जनरल नेगी ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा मेरठ के सेंट जॉन हायर सैकेंडरी स्कूल से की। उनके पिता दयाल सिंह नेगी बैंक के कार्मिक थे और मां सतेश्वरी नेगी गृहणी। 12वीं के बाद वर्ष 1977 में उनका चयन नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के लिए हुआ। एनडीए के बाद आईएमए से वह जून 1981 में पास आउट होकर सेना की 16 डोगरा रेजीमेंट में कमीशंड हुए। आईएमए की कमान संभालने से पहले वह स्ट्रैटजिक फोर्सेस कमांड में तैनात थे।


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