Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ पिथौरागढ़ पत्तियां दिखेंगी, खुशबू कमाल…. अंग्रेजों वाली बेड़ीनाग चाय के रिवाइवल का क्या है राज, पूरी कहानी
पिथौरागढ़उत्तराखंड न्यूज़

पत्तियां दिखेंगी, खुशबू कमाल…. अंग्रेजों वाली बेड़ीनाग चाय के रिवाइवल का क्या है राज, पूरी कहानी

सुबह से लेकर शाम तक हम भारतीय चाय पीने के शौकीन है। कहीं बाहर जाएं या कोई घर में आए, हमारे यहां किचन में झट से खौलने लगती है चाय। यूं कहिए कि हमें तो चाय पीने का बहाना चाहिए। अंग्रेजों के समय से आज तक चाय को लेकर दीवानगी बढ़ती ही चली गई। पर क्या वो स्वाद, खुशबू भी आप पा रहे हैं?

यह सवाल शायद आपके मन में कभी उठा हो, हो सकता है ये विचार में आया भी न हो पर ‘हिल मेल’ ने जब बेड़ीनाग चाय के मालिक और उद्यमी विनोद कार्की से बात की तो उन्होंने इस ओर विशेष जोर दिया। जी हां, उत्तराखंड की वादियों से निकलकर बेड़ीनाग की चाय अब तेजी से लोगों के किचन में पहुंच रही है।

बेड़ीनाग चाय में क्या खास, अंग्रेजों से सीधा कनेक्शन

आखिर क्या है अंग्रेजों से इसका कनेक्शन, दार्जिलिंग या दूसरी जगहों से उत्तराखंड की यह चाय कैसे अलग है, ऐसे तमाम पहलुओं पर बात की हिल मेल संवाददाता ने। विनोद कार्की ने बताया कि बेड़ीनाग टी वास्तव में अंग्रेजों के समय का ब्रांड है, जिसे उन्होंने शुरू किया है।

वह बताते हैं कि आजादी से पहले यह चाय लंदन के वेयरहाउसेज में जाती थी। जब अंग्रेज गए तो इस चाय की काफी डिमांड थी लेकिन सप्लाई नहीं हो पा रही थी। आगे चलकर बागान खत्म होने लगे। लोग जमीनें बेचने लगे और कंक्रीट बनने लगे। हमने इसे फिर से जिंदा करने की सोची और उसी चाय को फिर से स्थापित किया जिससे उत्तराखंड के चाय की महक दोबारा लोगों को मिले।

कार्की कहते हैं कि बेड़ीनाग टी उस समय का बड़ा फेमस ब्रांड रहा है। बेड़ीनाग का इतिहास ही चाय से जुड़ा है। यहां बेस्ट क्वॉलिटी की चाय, ग्रीन और ब्लैक टी बनती थी, जो बंद हो गई थी तो हमने उसी चीज को रिवाइव किया है। पर्यटन की बात करें तो पिथौरागढ़ जिले की वादियों में लोग बागानों के लिए ही आते थे और चाय खरीदते थे। अब वो चीजें से फिर से शुरू हो रही हैं।

 

कोरोना काल में काफी लोग खाली बैठ गए थे। हमने MSME सेक्टर के तहत कॉपरेटिव सोसाइटी बनाई और लोन लिया। हमें बड़ी ही आसानी से लोन मिला। यह सब इतने अच्छे ढंग से होगा, उम्मीद नहीं थई। पर्वतीय चाय उत्पादन स्वायत्त सहकारिता सोसाइटी बनाई। मेरा बागान तो है ही हमने कुछ लोगों को भी जोड़ रखा है जिससे चाय लेते हैं। हम ऑर्थोडॉक्स ब्लैक टी, ग्रीन टी के साथ कांडली (बिच्छू घास) चाय भी बना रहे हैं, जिसे हम गांव वालों से खरीद रहे हैं।

बेड़ीनाग चाय के उत्पादन और बिक्री की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से 12 लोगों को रोजगार मिला हुआ है और 25 लोग अप्रत्यक्ष रूप से कमाई कर रहे हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में नैनीताल से 160 किमी दूरी पर स्थित है बेड़ीनाग हिल स्टेशन।

 

खुशबू कैसे अलग होगी, समझिए

कार्की कहते हैं कि आज के समय में जो चाय लोग पी रहे हैं वह मशीन से सुखाई जाती है, ऐसे में पत्तियां पूरी तरह से क्रश हो जाती हैं और लोगों को वो स्वाद और खूशबू नहीं मिल पाती है। ऐसे में हम चाय को ड्राई करने के लिए मशीन की जगह आग की तपिश का इस्तेमाल करते हैं। उसकी खुशबू और स्वाद अलग ही होता है। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के समय में ऐसे ही चाय बनती थी और हमारी चाय गर्म पानी में मिलते ही पूरी तरह से खुल जाती है और फिर उसका जायका कमाल का होता है।

 

 

बेड़ीनाग चाय अब ऐमजॉन पर भी उपलब्ध है। रोजाना दर्जनभर से ज्यादा ऑर्डर मिल रहे हैं। ऐमजॉन पर लोग 40 प्रतिशत का डिस्काउंट भी पा रहे हैं। वैसे भी अगर अपने पसंदीदा चाय की प्याली को बेहतर बनाना हो तो लोग रेट नहीं क्वॉलिटी चाहते हैं।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...